जय हो मां गौरा के नंदन गणपती प्रथम मनाऊं भजन
जय हो मां गौरा के नंदन गणपती प्रथम मनाऊं भजन
जय हो मां गौरा के नंदन,गणपती प्रथम मनाऊं मैं,
आज राम गुण गाऊँ मैं।
सिर पर मुकुट कान में कुंडल,
माथे पर सोहै ही शुभ चंदन,
लाल नयन दीखे अति प्यारे,
रूप देख हरसाऊ मैं,
आज राम गुण गाऊँ मैं।
रूप चतुर्भुज और विशाला,
कंठ में सोहे मोतियन माला,
मोदक प्रिय बुध मंगल दाता,
चरण कमल चित् लाऊं मैं,
आज राम गुण गाऊँ मैं।
लंबोदर तुम मूसा वारे,
एक हाथ में परसू धारे,
विघ्न हरण गोरा के नंदन,
राजेंद्र शीश झुकाऊं मैं,
आज राम गुण गाऊँ मैं।
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गायक राजेंद्र प्रसाद सोनी
गीतकार राजेंद्र प्रसाद सोनी
संगीतकार राजेंद्र प्रसाद स्वामी
वीडियो एडिटिंग राजेंद्र प्रसाद सोनी
रिकॉर्डिंग राजेंद्र प्रसाद सोनी
गौरा माता के नंदन गणेश जी को सबसे पहले याद करना, मन को बड़ी शांति देता है। सिर पर मुकुट चमकता है, कानों में कुंडल झूलते हैं, माथे पर चंदन की लकीर सुंदर लगती है। लाल-लाल आँखें देखकर दिल खिल उठता है। उनका विशाल चतुर्भुज रूप देखते ही हरस आ जाता है। गले में मोतियों की माला शोभित होती है। मोदक उनका सबसे प्रिय भोग है, जो उन्हें खुशी से भर देता है। चरण कमल में मन लगाकर बैठने से सारी चिंताएँ हल्की हो जाती हैं।
लंबे पेट वाले लंबोदर जी एक हाथ में परशु धारण किए रहते हैं। विघ्न हरण करने वाले ये गौरा नंदन हर बाधा को दूर कर देते हैं। उनके सामने राजा-रंक सिर झुका देते हैं। राजेंद्र शीश नवाते हैं क्योंकि उनके पास आने से काम आसान हो जाते हैं। छोटी-छोटी मुश्किलें भी मिट जाती हैं। मन में बस यही भाव रह जाता है कि गणपति जी की कृपा से सब कुछ मंगलमय होता है। जीवन में बुद्धि, सुख और सफलता का द्वार खुल जाता है।
आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री गणेश जी की।
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