शीश जटा में गंग विराजे

शीश जटा में गंग विराजे

ॐ नाम एक सार है,
जासे मिटत कलेश,
ॐ नाम में छिपे हुए है,
ब्रम्हा विष्णु महेश।

शीश जटा में गंग विराजे,
गले में विषधर काले,
डमरू वाले ओ डमरू वाले।

तुमने लाखो की बिगड़ी बनाई,
अपने अंग भभूत रमाई,
जो भी तेरा ध्यान लगाए,
उसको सब दे डाले,
डमरू वाले ओ डमरू वाले।

नित अंग पे भस्मी लगाए,
जाने किसका तू ध्यान लगाए,
रहता है अलमस्त ध्यान में,
पीकर भंग के प्याले,
डमरू वाले ओ डमरू वाले।

सब देवो ने अमृत पाया,
तुम्हे जहर हलाहल भाया,
महल अटारी सबको बांटे,
तुम हो मरघट वाले,
डमरू वाले ओ डमरू वाले।

भोले सुनलो अरज हमारी,
हम आये शरण तुम्हारी,
सब देवो में देव बड़े हो,
दुनिया के रखवाले,
डमरू वाले ओ डमरू वाले।
 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा सगर के 60,000 पुत्रों ने कपिल मुनि को परेशान किया। इससे क्रोधित होकर, कपिल मुनि ने सगर के पुत्रों को भस्म कर दिया। सगर के पुत्रों को मुक्ति दिलाने के लिए, उनके पोते भगीरथ ने गंगा को स्वर्ग से पृथ्वी पर लाने का व्रत लिया। भगीरथ ने भगवान शिव की तपस्या की। शिव जी भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न हुए और उन्होंने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर लिया। भगीरथ ने गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिए अनुरोध किया। शिव जी ने गंगा को अपनी जटाओं से मुक्त कर दिया, लेकिन उन्होंने गंगा को अपनी जटाओं में धारण करने के कारण गंगा को अपना वेग नियंत्रित करने के लिए कहा।



Damru Wale O - डमरू वाले ओ | Gujarati Garba Bhakti 2018 | Manish Tiwari |
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