मेरी नईया के खेवनहार श्याम क्या तुम बन भजन
मेरी नईया के खेवनहार श्याम क्या तुम बन जाओगे भजन
मेरी नईया के खेवनहार,
श्याम क्या तुम बन जाओगे
भक्त-भगवान का रिश्ता,
बता दो तुम निभाओगे।।
सहारा मिल गया दर से,
गुजारा चल गया मेरा
कष्ट सब कट गए मेरे,
नाम जबसे लिया तेरा।।
बीच मझधार में पतवार,
श्याम क्या तुम बन जाओगे...
मेरी नईया के...
बोलो क्यों कर दी देरी,
श्याम हमको बचाने में
लगी थी दुनिया ये सारी,
मेरी इज्जत लुटाने में।।
मेरे जीवन के पालनहार,
नाथ क्या तुम बन जाओगे...
मेरी नईया के...
मुझे दर तेरे जो लाया,
श्याम तेरा दीवाना था
वो पागल था, वो प्रेमी था,
रोज का आना-जाना था।।
मोहनी सूरत का दीदार,
एक झलक क्या दिखलाओगे...
मेरी नईया के...
श्याम क्या तुम बन जाओगे
भक्त-भगवान का रिश्ता,
बता दो तुम निभाओगे।।
सहारा मिल गया दर से,
गुजारा चल गया मेरा
कष्ट सब कट गए मेरे,
नाम जबसे लिया तेरा।।
बीच मझधार में पतवार,
श्याम क्या तुम बन जाओगे...
मेरी नईया के...
बोलो क्यों कर दी देरी,
श्याम हमको बचाने में
लगी थी दुनिया ये सारी,
मेरी इज्जत लुटाने में।।
मेरे जीवन के पालनहार,
नाथ क्या तुम बन जाओगे...
मेरी नईया के...
मुझे दर तेरे जो लाया,
श्याम तेरा दीवाना था
वो पागल था, वो प्रेमी था,
रोज का आना-जाना था।।
मोहनी सूरत का दीदार,
एक झलक क्या दिखलाओगे...
मेरी नईया के...
मेरी नैया के खेवनहार तुम्ही , मेरा बेड़ा पार तुम्हीं से है | परम पूज्य गुरुजी #guru
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जब जीवन की लहरें उफान पर हों और पैरों तले जमीन धंसती नज़र आए, तो किसी एक स्थिर सहारे का मिल जाना ही सबसे बड़ा सहारा बन जाता है। उस नाम‑स्मरण से जूझते हुए मन को शांति मिलती है; संकटों की तीव्रता ढीली पड़ जाती है और जीने की राह फिर से साफ़ दिखने लगती है।
दर से पाया गया सहारा केवल समस्या का समाधान नहीं करता, वह अस्तित्व के खतरे में भी बचाने वाला बल बन जाता है। जब नाम ही जीवन का सहारा बन जाता है, तब व्यथा‑बोध कम होकर विश्वास और निर्भयता का आभास बढ़ जाता है। बीच‑मझधार में पतवार का प्रश्न यह दिखाता है कि अब वह एक सक्रिय मार्गदर्शक बनकर सामने आए—जो दिशा देता है, जो रोको-टोको में पकड़ दे, और नाव को किनारे तक पहुँचाने का आश्वासन देता है।
दर से पाया गया सहारा केवल समस्या का समाधान नहीं करता, वह अस्तित्व के खतरे में भी बचाने वाला बल बन जाता है। जब नाम ही जीवन का सहारा बन जाता है, तब व्यथा‑बोध कम होकर विश्वास और निर्भयता का आभास बढ़ जाता है। बीच‑मझधार में पतवार का प्रश्न यह दिखाता है कि अब वह एक सक्रिय मार्गदर्शक बनकर सामने आए—जो दिशा देता है, जो रोको-टोको में पकड़ दे, और नाव को किनारे तक पहुँचाने का आश्वासन देता है।
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Author - Saroj Jangir
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