बस्या बस्या म्हारे दिल में गुरु मुरारी

बस्या बस्या म्हारे दिल में गुरु मुरारी


बस्या बस्या म्हारे दिल में,
गुरु मुरारी, गुरु मुरारी,
समचाणे का ब्राह्मण,
सै ज्यान म्हारी।

भक्ति रंग में रंग्या होया,
इनै लिया श्याम का शरणा,
मेहंदीपुर में बालाजी के
दर पे धर दिया धरना,
दिया घर-घर में पहुंचा इनै,
बलकारी, बलकारी,
समचाणे का ब्राह्मण,
सै ज्यान म्हारी।

धर के सिर पे हाथ हमारे,
देई राम की माला,
जीवन में था अंधियारा,
वो कर गया आण उजाला,
कर गया, कर गया वो कृपा,
घणी भारी, घणी भारी,
समचाणे का ब्राह्मण,
सै ज्यान म्हारी।

सेवा भाव का पाठ पढ़ाया,
दिया धर्म का नारा,
भूखे पेट ना जानन दिया,
खोल राख्या भंडारा,
दे गया, दे गया वो प्रेम की,
पूंजी सारी, पूंजी सारी,
समचाणे का ब्राह्मण,
सै ज्यान म्हारी।

राजेश भगत पे कर राखी सै,
गुरु की छाया ठंडी,
दे दिया आशीर्वाद रहेगा,
सदा शिखर पे झंडी,
बणे-बणे र गजेन्द्र लक्की,
परचारी, परचारी,
समचाणे का ब्राह्मण,
सै ज्यान म्हारी।

बस्या बस्या म्हारे दिल में,
गुरु मुरारी, गुरु मुरारी,
समचाणे का ब्राह्मण,
सै ज्यान म्हारी।


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