ये जग की मात है रानी सती दादी भजन
ये जग की मात है रानी सती दादी भजन
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है,
जी चाहे जो भी मांग ल्यो,
ये जग की मात है,
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है।
बैठी है दादीजी लगाके दरबार,
गूंज रही चहुं ओर माँ की जयजयकार,
दुखिया पुकारे दादी मेहर करो,
जो भी तुझे ध्यावे भंडार भरो,
छोटी सी आस है मेरी,
छोटी सी बात है,
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है।
जग में निराला दादी तेज तेरा,
काहे अँधियारा मैया मनवा मेरा,
सबके भंडार भरो अन्न–धन से,
मुझे क्यों भुलाया दादी निज मन से,
आखिर खता है क्या मेरी,
क्यों दुःख का साथ है,
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है।
इतनी कृपा तो दादी हम पे करो,
भजनों में लगा रहूँ, विपदा हरो,
हाथों में उठा ल्यो थारो, मेहँदी बनूँ,
चरणां लगाल्यो थारी, पैजनी बनूँ,
चरणों में निखरे ‘मगन’,
मन की ये साध है,
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है।
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है,
जी चाहे जो भी मांग ल्यो,
ये जग की मात है,
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है।
और कीर्तन की रात है,
जी चाहे जो भी मांग ल्यो,
ये जग की मात है,
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है।
बैठी है दादीजी लगाके दरबार,
गूंज रही चहुं ओर माँ की जयजयकार,
दुखिया पुकारे दादी मेहर करो,
जो भी तुझे ध्यावे भंडार भरो,
छोटी सी आस है मेरी,
छोटी सी बात है,
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है।
जग में निराला दादी तेज तेरा,
काहे अँधियारा मैया मनवा मेरा,
सबके भंडार भरो अन्न–धन से,
मुझे क्यों भुलाया दादी निज मन से,
आखिर खता है क्या मेरी,
क्यों दुःख का साथ है,
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है।
इतनी कृपा तो दादी हम पे करो,
भजनों में लगा रहूँ, विपदा हरो,
हाथों में उठा ल्यो थारो, मेहँदी बनूँ,
चरणां लगाल्यो थारी, पैजनी बनूँ,
चरणों में निखरे ‘मगन’,
मन की ये साध है,
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है।
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है,
जी चाहे जो भी मांग ल्यो,
ये जग की मात है,
साँचो दरबार लग्यो,
और कीर्तन की रात है।
ये जग की मात है || SHIVANG SHARMA || DADI BHAJAN || SCI
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रानी सती दादीजी का दरबार भक्तों के लिए एक सच्चा आश्रय है। उन्हें शक्ति, ममता और त्याग की देवी माना जाता है। भक्त यह मानते हैं कि माँ रानी सतीजी अपने दरबार में आने वाले किसी भी भक्त को खाली हाथ नहीं लौटाती हैं। वे अपने भक्तों के दुखों को हरती हैं और उन्हें सुख-शांति प्रदान करती हैं। भक्त अपने मन की बात माँ के चरणों में रखता है और अपनी भक्ति के माध्यम से उनसे जुड़ना चाहता है। वह माँ से यह प्रार्थना करता है कि वह उसे हमेशा अपने भजनों में लगाए रखें और उसके जीवन से सभी विपदाओं को दूर करें। वह चाहता है कि माँ उसे अपने हाथों में उठा लें ताकि वह मेहंदी बन सके और उनके चरणों में लगकर पायल बन सके। यह इच्छा केवल एक भौतिक इच्छा नहीं, बल्कि माँ के साथ एक आध्यात्मिक और भावनात्मक जुड़ाव की चाह है।
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पिया पहलम जाउंगी खाटू में
आज ते पाछे भोलेनाथ ना घोटूँ भँग
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Author - Saroj Jangir
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