दिल में अरमान है माँ द्वार तेरे आऊँ मैं
दिल में अरमान है माँ द्वार तेरे आऊँ मैं
दिल में अरमान है माँ,
द्वार तेरे आऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
मन में उठती हैं तरंगें,
तेरा दर्शन होगा,
शुभ घड़ी कब आएगी,
माँ–सुत का मिलन होगा,
तेरी ममता से भरी गोद में,
सुख पाऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
तेरी बगिया में गृहस्थी,
मेरी सँवरती रहे,
तेरी कृपा मेरे ऊपर,
सदा बरसती रहे,
है तमन्ना मेरे मन में,
तुझे ही ध्याऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
मेरी ममतामयी जननी,
दया का सागर है,
मेरी भक्ति भी माँ के नाम
से उजागर है,
दर्शन मिलता रहे मन को,
यही समझाऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
ये जगजननी सभी के दिल की,
हर इक साँस में है,
जब भी महसूस करो माँ तो,
उसके पास में है,
कहे ‘परशुराम’ कहीं और
नहीं जाऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
दिल में अरमान है माँ,
द्वार तेरे आऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
द्वार तेरे आऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
मन में उठती हैं तरंगें,
तेरा दर्शन होगा,
शुभ घड़ी कब आएगी,
माँ–सुत का मिलन होगा,
तेरी ममता से भरी गोद में,
सुख पाऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
तेरी बगिया में गृहस्थी,
मेरी सँवरती रहे,
तेरी कृपा मेरे ऊपर,
सदा बरसती रहे,
है तमन्ना मेरे मन में,
तुझे ही ध्याऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
मेरी ममतामयी जननी,
दया का सागर है,
मेरी भक्ति भी माँ के नाम
से उजागर है,
दर्शन मिलता रहे मन को,
यही समझाऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
ये जगजननी सभी के दिल की,
हर इक साँस में है,
जब भी महसूस करो माँ तो,
उसके पास में है,
कहे ‘परशुराम’ कहीं और
नहीं जाऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
दिल में अरमान है माँ,
द्वार तेरे आऊँ मैं,
बैठ चरणों में तेरा गीत,
सदा गाऊँ मैं।
दिल में अरमान है माँ-सौरभ उपाध्याय#माँ #shiv #bhajan #hanuman #radheradhe #ganesh #krishn #ram #
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हर भक्त के हृदय में यही प्रबल इच्छा होती है कि वह अपनी माँ के दरबार में जाए। जीवन की हर राह में व्यक्ति के मन में एक ही कामना रहती है कि वह जल्द से जल्द माँ के चरणों में जाकर बैठ जाए और उनके भजन गाए। भक्त के मन में यह विश्वास है कि एक दिन माँ के दर्शन होंगे और वह शुभ घड़ी ज़रूर आएगी जब एक माँ और उसके बच्चे का मिलन होगा। इसी आशा में वह हर दिन जीता है, यह मानते हुए कि माँ की ममता की गोद में उसे ही सच्चा सुख मिलेगा। वह यह भी जानता है कि माँ की कृपा से ही उसका गृहस्थ जीवन सफल हो सकता है, और इसलिए वह माँ से यही प्रार्थना करता है कि उनकी कृपा हमेशा उस पर बनी रहे।
संसार की जननी माँ दुर्गा को ही आदिशक्ति माना गया है। वह दया का सागर हैं और उनकी ममता की कोई सीमा नहीं है। भक्त जब भी माँ को सच्चे मन से याद करता है, तो उसे अपनी हर साँस में माँ की उपस्थिति महसूस होती है। यह अटूट विश्वास ही भक्ति को और भी दृढ़ बनाता है। जब भक्त को यह एहसास हो जाता है कि माँ हमेशा उसके पास हैं, तो वह और कहीं नहीं जाता। माँ दुर्गा अपने भक्तों को संसार के दुखों से दूर रखती हैं और उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाती हैं। वे केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी भक्त को अपने करीब रखती हैं, जिससे भक्त का मन शांत और स्थिर रहता है और वह अपनी भक्ति को माँ के नाम से ही उजागर करता है।
यह भजन भी देखिये
पिया पहलम जाउंगी खाटू में
आज ते पाछे भोलेनाथ ना घोटूँ भँग
हर भक्त के हृदय में यही प्रबल इच्छा होती है कि वह अपनी माँ के दरबार में जाए। जीवन की हर राह में व्यक्ति के मन में एक ही कामना रहती है कि वह जल्द से जल्द माँ के चरणों में जाकर बैठ जाए और उनके भजन गाए। भक्त के मन में यह विश्वास है कि एक दिन माँ के दर्शन होंगे और वह शुभ घड़ी ज़रूर आएगी जब एक माँ और उसके बच्चे का मिलन होगा। इसी आशा में वह हर दिन जीता है, यह मानते हुए कि माँ की ममता की गोद में उसे ही सच्चा सुख मिलेगा। वह यह भी जानता है कि माँ की कृपा से ही उसका गृहस्थ जीवन सफल हो सकता है, और इसलिए वह माँ से यही प्रार्थना करता है कि उनकी कृपा हमेशा उस पर बनी रहे।
संसार की जननी माँ दुर्गा को ही आदिशक्ति माना गया है। वह दया का सागर हैं और उनकी ममता की कोई सीमा नहीं है। भक्त जब भी माँ को सच्चे मन से याद करता है, तो उसे अपनी हर साँस में माँ की उपस्थिति महसूस होती है। यह अटूट विश्वास ही भक्ति को और भी दृढ़ बनाता है। जब भक्त को यह एहसास हो जाता है कि माँ हमेशा उसके पास हैं, तो वह और कहीं नहीं जाता। माँ दुर्गा अपने भक्तों को संसार के दुखों से दूर रखती हैं और उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाती हैं। वे केवल शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी भक्त को अपने करीब रखती हैं, जिससे भक्त का मन शांत और स्थिर रहता है और वह अपनी भक्ति को माँ के नाम से ही उजागर करता है।
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Author - Saroj Jangir
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