नाम रंग चढ़िया जेहड़ा गुरां दी शरणी आया

नाम रंग चढ़िया जेहड़ा गुरां दी शरणी आया

नाम रंग चढ़िया जेहड़ा गुरां दी शरणी आया

नाम रंग चढ़िया जी, नाम रंग चढ़िया,
चढ़िया चढ़ाया जेहड़ा गुरां दी शरणी आया,
छड्ड सारी मोह माया, ओहनूं नाम रंग चढ़िया,
नाम रंग चढ़िया जी, नाम रंग चढ़िया,

एहे रंग भिलनी माई नूं वी चढ़िया,
भिलनी करे कलोल, मेरे सतिगुर मेरे कोल,
मैनूं होर कोई ना लोड़, मैनूं नाम रंग चढ़िया,
नाम रंग चढ़िया जी, नाम रंग चढ़िया,

एहे रंग मीरां बाई नूं वी चढ़िया,
मीरां करे कलोल, मेरे सतिगुर मेरे कोल,
मैनूं होर कोई ना लोड़, मैनूं नाम रंग चढ़िया,
नाम रंग चढ़िया जी, नाम रंग चढ़िया,

एहे रंग द्रौपदी माई नूं वी चढ़िया,
द्रौपदी करे कलोल, मेरे सतिगुर मेरे कोल,
मैनूं होर कोई ना लोड़, मैनूं नाम रंग चढ़िया,
नाम रंग चढ़िया जी, नाम रंग चढ़िया,

एहे रंग माता रत्नो नूं वी चढ़िया,
रत्नो करे कलोल, पौनहारी मेरे कोल,
मैनूं होर कोई ना लोड़, मैनूं नाम रंग चढ़िया,
नाम रंग चढ़िया जी, नाम रंग चढ़िया,
चढ़िया जी, चढ़िया जी, नाम रंग चढ़िया,


नाम रंग चढ़ेया~Nam Rang Chdeya || Sanjeev Kaushal bhajan || Himachali Bhajan || Satsangi Bhajan.

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प्यारे दोस्तो ! तो एक बार फिर से बहुत ही प्यारा सतगुरू भजन लेकर आप सब के बीच प्रस्तुत हुए हैं।जिस किसी को भी नाम रंग अर्थात भक्ति का रंग चढ़ जाता है उसके सामने दुनिया के सब रंग फ़ीके पड़ जाते हैं । फिर क्या छोटा और क्या बड़ा, सब एक बराबर हो जाते हैं । यही कुछ इस भजन में आप सब को सुनने को मिलेगा ।उम्मीद करते हैं कि आप इस भजन को भी पहले की तरह अपना प्यार और आशीर्वाद ज़रूर देंगे । भजन को अपने हर दोस्तों व रिश्तेदारों के बीच शेयर करना । हम ऐसे ही प्यारे प्यारे प्रोजेक्ट आप सब के बीच लाते रहते हैं । इसलिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब ज़रूर कर लेना जी ताकि हर गीत व भजन आपके बीच सबसे पहले पहुँच सके ।

तुम्हारे हृदय में गुरु का नाम रंग चढ़ गया है। यह रंग कोई साधारण रंग नहीं है, बल्कि वह रंग है जो मन की सारी मोह-माया को धो डालता है। जब तुम गुरु की शरण में आते हो, तो तुम्हें यह महसूस होता है कि गुरु हमेशा तुम्हारे साथ हैं। यह नाम का रंग इतना गहरा है कि इसके चढ़ने के बाद जीवन में किसी और चीज़ की चाहत नहीं रह जाती।

यह भजन हमें यह समझाता है कि गुरु की भक्ति का यह नाम-रंग किसी भी जाति या वर्ग के व्यक्ति पर चढ़ सकता है। जिस तरह शबरी (भिलणी), मीराबाई, और द्रौपदी ने अपने गुरु और ईश्वर के नाम का रंग अपने जीवन में उतारा, उसी तरह तुम भी इस रंग में डूब सकते हो। शबरी ने झूठे बेर खिलाकर भी राम का प्रेम पाया, मीरा ने कृष्ण भक्ति में राजपाट त्याग दिया, और द्रौपदी ने अपनी लाज बचाने के लिए केवल कृष्ण का नाम लिया। इसी तरह, बाबा बालक नाथ की भक्त माता रतनो को भी पौणाहारी का नाम-रंग चढ़ा, जिससे उन्हें गुरु का सान्निध्य प्राप्त हुआ। यह भजन यह बताता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति के आगे हर बाधा झुक जाती है और गुरु हमेशा अपने भक्त के पास रहते हैं।
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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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