माटी के मूर्ति से ताकेली मुसुकाई के भोजपुरी भजन

माटी के मूर्ति से ताकेली मुसुकाई के भोजपुरी भजन


माटी के मूर्ति से
ताकेली मुसुकाई के
त अजबे रूप सुहावन लागे
दुर्गा माई के
त अजबे रूप सुहावन लागे
दुर्गा माई के

आग खाती आग बाड़ी
पानी खाती पानी
जे जइसे चाहे वइसे
मिले माता रानी
छन में मईया सब कुछ देली
मनसाई के
त अजबे रूप सुहावन लागे
दुर्गा माई के

इहे मन करे माई
साल भर रहिती
एक बेरी अइती त
फेर नाहीं जइती
लोगवा भगिया जगावे दुअरा
आई के
त अजबे रूप सुहावन लागे
दुर्गा माई के

जबसे बैठली मईया
आके पंडाल में
अजबे के ऊर्जा बावे
देख प्यारेलाल में
सर्वेश सब कुछ पवले
देवी भजनियां गाई के
त अजबे रूप सुहावन लागे
दुर्गा माई के

माटी के मूर्ति से
ताकेली मुसुकाई के
त अजबे रूप सुहावन लागे
दुर्गा माई के
त अजबे रूप सुहावन लागे
दुर्गा माई के


Mati ke murti se takeli muskayi ke gajbe roop suhawan Lage Durga mai ke

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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