यशोदा तेरो चिर जीवे कुंवर कन्हैया

यशोदा तेरो चिर जीवे कुंवर कन्हैया भजन

 
यशोदा तेरो चिर जीवे कुंवर कन्हैया

चिर जीवे तेरो कन्हैया,
यशोदा तेरो चिर जीवे कुंवर कन्हैया।

मथुरा में हरि जन्म लियो है,
गोकुल बजत बधाईयां,
यशोदा तेरो चिर जीवे कुंवर कन्हैया।

रत्न जड़ित पलना पे पौडत,
झूलत कुंवर कन्हैया,
मैया तेरो चिर जीवे कुंवर कन्हैया।

चलो सखी दर्शन कर आवें,
प्रगटे हैं दाऊ जी के भैया,
यशोद तेरो चिर जीवे कुंवर कन्हैया।

चन्द्रसखी भज बाल कृष्ण छवि,
बार बार बलि जैया,
हो मैया तेरो चिर जीवे कुंवर कन्हैया।

नंद के आनन्द भयो,
जय कन्हैया लाल की।

Bhajan ।। चिर जीवे तेरो कन्हैया, यशोदा तेरो चिर जीवे कुंवर कन्हैया ।। Sanjiv Krishna Thakur Ji

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यशोदा की गोद में कन्हैया का जन्म केवल एक पुत्र प्राप्ति नहीं था, यह श्रद्धा के परम फल का उदय था। “चिर जीवे तेरो कन्हैया” कहने में केवल मातृस्नेह नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि की प्रार्थना छिपी है कि यह बाल रूप सदा जीवित रहे, सदा आनंद का कारण बने। मथुरा से आई उस जन्म की खबर जैसे‑जैसे गोकुल पहुँची, वैसे‑वैसे घर‑घर दीपक जल उठे। ढोलकें बजीं, सखियाँ उछल पड़ीं, और नंद का आँगन प्रेम में भीग गया। रत्नजड़ित पलने में झूलते छोटे कन्हैया में सबने केवल बालक नहीं, खुद ब्रह्म का बाल‑रूप देखा, जो माँ की लोरी में, सखियों की हँसी में, और गोकुल की हवाओं में गूँज उठा।

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