सांवेर की धरती हनुमत साजे भजन

सांवेर की धरती हनुमत साजे


सांवेर की धरती
सांवेर की धरती हनुमत साजे,
चले हैं इनकी मर्जी। सांवेर की धरती।

पाताल में जाकर जब बजरंग,
अहिरावन राज मिटाते हैं,
दिल बाग-बाग हो जाता है,
जब राम हृदय मुस्काते हैं।
सुन के पतन की आवाजें,
सुन के पतन की आवाजें,
यूँ लगे कहीं विध्वंस जगे।
अरे राम लखन संग आते ही,
सेना के मन संग हर्ष जगे।

बजरंग बाबा की यह प्रतिमा,
यहाँ उल्टा दर्शन देती है,
ग़म कोसों दूर हो जाता है,
कष्ट और पीड़ा हर लेती है।
सुन जयसियाराम के नारों से,
सुन जयसियाराम के नारों से,
नगर, गगन, पूरा जगे।
सांवेर नगर की यह भूमि,
इंदौर उज्जैन के मध्य बसी।


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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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