दुख में यही तेरे काम आएगा भजन
दुख में यही तेरे काम आएगा भजन
कोई आए या ना आए,
मेरा श्याम आएगा,
दुख में यही तेरे काम आएगा।
दुनिया वालों से मैं अपने,
सुख दुःख कभी ना कहता,
मेरी चिंता करने वाला,
खाटू में है बैठा,
बिन बोले ही सबकुछ,
वो जान जाएगा,
दुख में यही तेरे काम आएगा।
कोई आए या ना आए,
मेरा श्याम आएगा,
दुख में यही तेरे काम आएगा।
और किसी के आगे क्यों मैं,
लाज गवाऊ मेरी,
मेरे श्याम को तो बस है,
यहाँ कहने भर की देरी,
जो मैं कहूँगा वो मान जाएगा,
दुख में यही तेरे काम आएगा।
कोई आए या ना आए,
मेरा श्याम आएगा,
दुख में यही तेरे काम आएगा।
दुख में यही तेरे काम आएगा।
कोई आए या ना आए,
मेरा श्याम आएगा,
दुख में यही तेरे काम आएगा।
मेरा श्याम आएगा दुख में यही काम आएगा | Shyam Bhajan by Mona Mehta Madan-Kotputli Dharamshala Khatu Shyam Ji Ekadasi kirtan
Koee Aae Ya Na Aae,
Mera Shyaam Aaega,
Dukh Mein Yahee Tere Kaam Aaega.
मालिक कै कारण जोग फकीरी धारी॥टेर॥
है होणहार बलवान, कर्म गति न्यारी।
बिधना का लिखिया लिख, टरै नहीं टारी॥1॥
थारा राजपाट धन माल, सभी रुल ज्यावै।
थारा देख के भगवाँ भेष, शरम मोय आवै॥2॥
है राजपाट घनमाल, सपन की माया।
भिक्षा दे पिंगला मात, भरथरी आया॥3॥
राणी खड़ी सभा कै बीच, लट इयाँ तोड़ै।
मेरा सात फेराँ का पीव, मतीना मुख मोड़ै॥4॥
तेरो मयो गोरखनाथ, पति भरमाया।
मेरो राजन बिछुड्यो जाय, तड़फ रही काया॥5॥
मत देवो गुरु नै गाल, अमर करी काया।
मत तड़फै पिंगला मात, प्रभु की माया॥6॥
गुरु खड्या जंगल कै बीच, देया रया हेला।
थे आओ भरतकुमार गुरु का चेला
जीवन के दुखों में जब कोई साथ न दे, तब भी एक अटूट विश्वास मन को संबल देता है। वह है उस श्याम का सहारा, जो बिना बुलाए, बिना कुछ कहे, हर पीड़ा को समझ लेता है। यह विश्वास सिखाता है कि सांसारिक संबंधों की अपेक्षा से ऊपर एक ऐसी शक्ति है, जो मौन में भी हमारी पुकार सुन लेती है। जैसे कोई पथिक रेगिस्तान में भटकता हो और उसे दूर से एक ठंडी छाँव दिखे, वैसे ही श्याम का नाम दुख की तपन में शांति देता है।
मनुष्य अक्सर अपनी व्यथा दुनिया के सामने रखकर हल्का होना चाहता है, पर सच्चा सुकून तब मिलता है, जब वह अपनी बात उस तक पहुँचाए, जो बिना शब्दों के ही सब जान ले। खाटू में विराजे उस प्रभु के सामने न झिझक है, न संकोच। वहाँ बस एक सच्ची पुकार काफी है। यह विश्वास मन को यह शिक्षा देता है कि अपनी लाज को दुनिया के सामने बिखेरने की बजाय, उसे उस शरण में ले जाओ, जहाँ हर दुख का अंत है।
चिंतन करें तो यह समझ आता है कि जीवन का हर दुख एक अवसर है—अपने भीतर की शक्ति को जगाने का, और उस अनंत कृपा से जुड़ने का। श्याम का यह भरोसा केवल सहारा नहीं, बल्कि एक मार्ग है, जो सिखाता है कि सच्ची भक्ति में न दिखावा है, न शोर। बस एक निश्छल भाव ही उसे हमारे पास खींच लाता है। दुख हो या सुख, यह विश्वास कि वह आएगा, मन को हर परिस्थिति में अडिग रखता है।
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Author - Saroj Jangir
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