मोहें काहे हो ठुकराए कान्हा बिन तोरे दर्श

मोहे काहे हो ठुकराए कान्हा बिन तोरे दर्श


मोहे काहे हो ठुकराए कान्हा,
बिन तोरे दर्श, चैन न पाऊँ,
ये कैसी प्रीत लगाए कान्हा?
मोहे काहे हो ठुकराए कान्हा...

बिन सुने मुरली की तान तुम्हारी,
मोसे रहा न जाए कान्हा,
नैन तरसते, प्राण तड़पते,
पथ में बाट निहारे कान्हा...
मोहे काहे हो ठुकराए कान्हा...

तोरी मदभरी अँखियाँ विह्वल कर दे,
ये दास कहाँ अब जाए कान्हा?
हर साँस में तेरा ही नाम बसे,
तेरी शरण में आए कान्हा...
मोहे काहे हो ठुकराए कान्हा...

भवसागर में भटक रहा हूँ,
क्यूँ नहीं पास बुलाए कान्हा?
छोड़ ना देना, हाथ थाम लेना,
अब तो चरणों में आए कान्हा...
मोहे काहे हो ठुकराए कान्हा...


मन को मोहित कर देने वाला भजन। कान्हा मोहे ऐसो बनाइये मोर | Kanha Mohe Eso Banaiyo Mor | Shyam

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कान्हा की प्रीत ऐसी है, जैसे राधा का हृदय बिना उनके दर्शन अधूरा। उनकी मुरली की तान बिन मन बेचैन, जैसे पंछी बिन आकाश। नैन उनकी राह ताकते हैं, प्राण तड़पते हैं, हर साँस में बस उनका नाम बसता है। उनकी मदभरी अँखियों की एक झलक मन को विह्वल कर देती है, फिर यह दास कहाँ जाए?

भवसागर में डूबता मन पुकारता है, कान्हा, पास बुला लो। जैसे माँ बच्चे का हाथ थामती है, वैसे ही वे अपने भक्त को चरणों में स्थान देते हैं। संत कहते हैं, कान्हा की शरण में जाओ, वह कभी ठुकराते नहीं। चिंतक देखता है, उनकी प्रीत जीवन को प्रेम और शांति से भर देती है। धर्मगुरु सिखाते हैं, हर साँस में कृष्ण का नाम रमाओ, वे सदा पास हैं।

कान्हा, छोड़ ना देना, यह दास तेरे चरणों में आया है। बस एक बार दर्शन दे दो, क्योंकि तेरी प्रीत ही जीवन का आधार है।
 
Singer - Ramkumar Lakkha
Label - Shyam Bhajan
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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