सुनो श्याम क्यों तुम लगाते हो काजल भजन

सुनो श्याम क्यों तुम लगाते हो काजल भजन

सुनो श्याम, क्यों तुम लगाते हो काजल,
हमारी नज़र बेअसर हो रही है।।

पांवों की अपने न खनकाओ पायल,
चाहत मेरी बेसबर हो रही है।।

हुई बनवारी मैं, हुई मैं तेरी पागल,
नज़र क्यों न तेरी इधर हो रही है।।

निगाहों निगाहों में होने दो हलचल,
ज़माने को सारी खबर हो रही है।।

राधा, तुम्हीं हो मेरी प्रेम धारा,
तुम्हारे बिना न आधा हमारा,
तुम्हीं मेरी नज़रों में रहती हो हर पल,
जो हालत उधर है, इधर भी वही है।।

तुम्हीं प्रीत मेरी, तुम्हीं मीत मेरे,
तुम्हीं साज, सरगम हो, संगीत मेरे,
अधरों से तेरे ये मधुर रस की बारिश,
कन्हैया, न जाने किधर हो रही है।।

मैं तेरा सांवरा, तू मेरी संवारी,
मैं दीवाना तेरा, तू मेरी बनवारी,
मैं दीवाना तेरा, तू मेरी बनवारी,
ख्यालों में तेरे पता न चलेगा,
हुई श्याम, कब दोपहर हो रही है।।

सुनो मेरे मोहन, सुनो हे कन्हैया,
रखना हमें अपनी पलकों की छइयां,
हमारी कसम, न कभी दूर होना,
मेरे दिल में दर की लहर हो रही है।।



सुनो श्याम क्यों तुम लगाते हो काजल - ये भजन सीधा आपके मन को छू लेगा !! Shivani Krishn Bhajan

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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