बांके बिहारी को दिल में बसाना है
बांके बिहारी को दिल में बसाना है
बांके बिहारी को, दिल में बसाना है।।
सांसों की लड़ी, न जाने कब टूट जाए,
राहों में कोई साथी, कहां छूट जाए।।
किसका भरोसा यहां, झूठा जमाना है,
बांके बिहारी को, दिल में बसाना है।।
यूं ही नहीं हूं मैं, उसका दीवाना,
कोई तो रिश्ता है, जन्मों पुराना।।
मैंने तो अब जाके, राज ये जाना है,
बांके बिहारी को, दिल में बसाना है।।
जाके सतीश-मित्र, प्रभु की शरण में,
फिर न बढ़ूंगा, कभी जन्म-मरण में।।
उसकी लगन में, मगन सब गाना है,
बांके बिहारी को, दिल में बसाना है।।
जिसका हूं मैं, उसे अपना बनाना है,
बांके बिहारी को, दिल में बसाना है।।
बांके बिहारी को दिल में बसाना है | Vikas Sardana | Krishan Bhajan | Shyam Bhajan 2021
भक्ति की यह पुकार आत्मा की उस पहचान को दर्शाती है, जो जन्मों से प्रभु के साथ जुड़ी हुई है। सांसों का अनिश्चित प्रवाह और संसार की अस्थिरता इस सत्य की ओर संकेत करती है कि स्थायी शरण केवल प्रभु के चरणों में ही मिल सकती है। जब मन सांसारिक धोखे और मोह से हटकर कृष्ण को अपनाने की आकांक्षा करता है, तब भक्ति की सच्ची अनुभूति प्रारंभ होती है।
यह प्रेम केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मा का जागरण है। प्रभु से यह रिश्ता जन्मों पुराना है—एक ऐसा संबंध जो किसी सांसारिक बंधन से परे है। जब यह साक्षात्कार होता है, तब हृदय अनायास कृष्णमय हो जाता है। उसकी लगन में मगन होकर गाना जीवन की वास्तविक साधना बन जाता है।
शरणागति का यह भाव जीवन के चक्र को तोड़ने की इच्छा प्रकट करता है। कृष्ण के चरणों में समर्पण ही उस स्थिति तक पहुंचने का मार्ग है, जहाँ जन्म-मरण की गति समाप्त होती है और केवल दिव्य आनंद का अनुभव होता है। यही प्रेम ही व्यक्ति को उसके सच्चे स्वरूप से परिचित कराता है—जहाँ वह स्वयं को पूर्ण रूप से श्री कृष्ण में विलीन कर देता है। यही भक्ति का उच्चतम सत्य है।