आवो आवो सा गुरु दीन दयाल थाने भजन

आवो आवो सा गुरु दीन दयाल थाने भजन

आवो~आवो सा गुरु दीनदयाल,
थाने आयो शुभ की घड़ी।।

आत्म~तत्त्व अति गूढ़ बतायो,
गावे वेद~पुराण,
गीता, भागवत और रामायण,
सब ही लीन्हा छाण,
पायो~पायो जी मैं,
शरणागत में आय,
थाने आयो शुभ की घड़ी।।

अण्डज अरु जरायुज,
उद्भिज पाई जीवा~जूण,
भरम~भरम के बहु दुःख पायो,
भूल गयो वह मूल,
जासे उत्पत्ति,
प्रलय नित होय,
थाने आयो शुभ की घड़ी।।

ना मैं मरूँ, नहीं मैं जन्मूँ,
नहीं हो आवा~गोन,
श्यामसुन्दर ने गीता मांही,
प्रकट दिखायो रूप,
वही झिलमिल ज्योति अनूप,
थाने आयो शुभ की घड़ी।।

भैरूराम गुरु~कृपा सूं,
दरस्या चेतन नूर,
कमला निज अनुभव कर देख्यो,
पायो सहज स्वरूप,
जा के आश्रित पिण्ड~स्थूल,
थाने आयो शुभ की घड़ी।।

आवो~आवो सा गुरु दीनदयाल,
थाने आयो शुभ की घड़ी।।



!! Sanwariya Newai !! आओ सा गुरु दीनदयाल - Guru Mahima - राजस्थानी मधुर भजन

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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