मुरली जोर की बजाई रे नंदलाला भजन

मुरली जोर की बजाई रे नंदलाला भजन

(मुखड़ा)
मुरली ज़ोर की बजाई रे नंदलाला,
नंदलाला ओ गोपाला, नंदलाला ओ गोपाला।
मुरली ज़ोर की बजाई रे नंदलाला।

(अंतरा)
मुरली की आवाज़ मुझे बागों में सुनाई थी,
ओ मुरली, ओ फूलवा तोड़ते बजाई रे नंदलाला।
मुरली ज़ोर की बजाई रे नंदलाला।

मुरली की आवाज़ मुझे तालों पे सुनाई थी,
ओ मुरली, ओ साड़ी धोते बजाई रे नंदलाला।
मुरली ज़ोर की बजाई रे नंदलाला।

मुरली की आवाज़ मुझे कुएं पे सुनाई थी,
ओ मुरली, ओ चारी भरते बजाई रे नंदलाला।
मुरली ज़ोर की बजाई रे नंदलाला।

मुरली की आवाज़ मुझे चौके पे सुनाई थी,
ओ मुरली, ओ भोजन खाते बजाई रे।
मुरली ज़ोर की बजाई रे नंदलाला।

मुरली की आवाज़ मुझे मंदिर में सुनाई थी,
ओ मुरली, ओ पूजा करते बजाई रे।
मुरली ज़ोर की बजाई रे नंदलाला।

(पुनरावृत्ति)
मुरली ज़ोर की बजाई रे नंदलाला।
 

जया किशोरी का दिल को मस्त कर देने वाला भजन | बंसी जोर की बजाई रे नंदलाला | Bhajan Sandhya

सुन्दर भजन में श्रीकृष्णजी की मुरली की मधुरता और उनकी सर्वव्यापी उपस्थिति का मनमोहक चित्रण है। मुरली की तान केवल एक ध्वनि नहीं, बल्कि आत्मा को प्रभु की ओर खींचने वाला आह्वान है, जो हर स्थान और हर कार्य में उनकी उपस्थिति को दर्शाती है। बागों में फूल तोड़ते, ताल पर साड़ी धोते, कुएं पर चरस भरते, चौके में भोजन बनाते, और मंदिर में पूजा करते समय मुरली की आवाज सुनाई देती है। यह प्रदर्शित करता है कि श्रीकृष्णजी का प्रेम और कृपा जीवन के हर पल में समाई है। जैसे एक मधुर गीत मन को बांध लेता है, वैसे ही उनकी मुरली हृदय को भक्ति में डुबो देती है।

यह मुरली का स्वर सांसारिक कार्यों के बीच भी प्रभु की याद दिलाता है। चाहे गृहस्थ जीवन की व्यस्तता हो या पूजा की एकांत घड़ियां, श्रीकृष्णजी हर जगह साथ हैं। यह उद्गार बताता है कि सच्ची भक्ति विशेष समय या स्थान तक सीमित नहीं; वह रोजमर्रा के कार्यों में भी जीवंत हो सकती है। जैसे एक नदी का प्रवाह हर किनारे को छूता है, वैसे ही श्रीकृष्णजी की मुरली का स्वर हर हृदय तक पहुंचता है। यह भक्ति का मार्ग है, जो सिखाता है कि प्रभु का स्मरण हर क्षण में आत्मा को शांति और आनंद देता है।

Video Name :-  बंसी जोर की बजाई रे नंदलाला
Singer Name - जया किशोरी
Category - Devotional Bhakti bhajan

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