हृदय तुमकी करवायो लिरिक्स
हृदय तुमकी करवायो। हूं आलबेली बेल रही कान्हा॥१॥
मोर मुकुट पीतांबर शोभे। मुरली क्यौं बजावे कान्हा॥२॥
ब्रिंदाबनमों कुंजगलनमों। गड उनकी चरन धुलाई॥३॥
मीराके प्रभु गिरिधर नागर। घर घर लेऊं बलाई॥४॥
यह भजन मीराबाई की श्री कृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम को व्यक्त करता है। पहले शेर में, मीराबाई कहती हैं कि भगवान ने उनके हृदय में प्रेम की जो लहर उत्पन्न की है, वही उनकी पूरी दुनिया बन गई है, और वह श्री कृष्ण के प्रेम में लीन हो गई हैं। दूसरे शेर में, वह भगवान श्री कृष्ण का रूप वर्णन करती हैं, जहाँ वह मोर मुकुट और पीतांबर (पीला वस्त्र) पहने हुए अत्यंत सुंदर लगते हैं, और उनकी बांसुरी की ध्वनि से सारी ब्रह्मांड को मोह लेती है। तीसरे शेर में, मीराबाई श्री कृष्ण के साथ बिताए गए ब्रिंदा वन के समय को याद करती हैं, जहाँ वह उनके चरणों की पूजा करती हैं और उनकी सेवा में रत रहती हैं। चौथे शेर में, मीराबाई अपने प्रभु गिरिधर नागर से आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करती हैं और यह कहती हैं कि वह उनके प्रेम में इतनी तल्लीन हो गई हैं कि हर घर में श्री कृष्ण का नाम लिया जाए। इस भजन में मीराबाई भगवान श्री कृष्ण के प्रेम में पूरी तरह समर्पित हैं, और उनकी भक्ति में लहराते हुए जीवन की सच्ची खुशी और शांति का अनुभव करती हैं।