सजणी कब मिलस्याँ पिय म्हाराँ लिरिक्स

सजणी कब मिलस्याँ पिय म्हाराँ लिरिक्स

सजणी कब मिलस्याँ पिय म्हाराँ।
चरण कँवल गिरधर सुख देख्याँ, राख्यां नैणाँ थेरा।
णिरखाँ म्हारो चाव घणेरो मुखड़ा देख्यां थाराँ।
व्याकुल प्राण धरयांणा धीरज वेग हरयाँ म्हा पीराँ।
मीरां रे प्रभु गिरधरनागर, थें बिण तपण घणेरा।।

(पिव=प्रियतम, थेरा=समीप,सामने, णिरखाँ=निरखने का,दर्शन करने का, धरयाँणा धीरज=धैर्य नहीं धरते, तपण=दुःख, घणेरा=अधिक)


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