सखी री लाज बैरण भई लिरिक्स
सखी री लाज बैरण भई।।टेक।।
श्रीलाल गोपाल के सँग, काहे नाहीं गई।
कठिन क्रूर अक्रूर आयो, साजि रथ कहै नई।
रथ चढ़ाय गोपाल लैगो, हाथ मींजत रही।
कठिन छाती स्याम बिछुरत, बिरह तें मत तई।
दासी मीरां लाल गिरिधर, बिखर क्यूँ ना गई।।
(क्रूर=कठिन, अक्रूर=कंस का एक दूत जो कृष्ण को रथ पर चढ़ाकर मथुरा ले गया, हाथ मींजत रही=हाथ मलती रही, तई= संपत्प होती रही, बिखर क्यूँ ना गई=टुकड़े-टुकड़े क्यों न हो गई)
Desi Bhajan,meera Bai Bhajan Lyrics Hindi