सखि म्हाँरो सामरियाणे देखवाँ कराँरी लिरिक्स

सखि म्हाँरो सामरियाणे देखवाँ कराँरी लिरिक्स

सखि म्हाँरो सामरियाणे, देखवाँ कराँरी ।।टेक।।
साँवरो उमरण, साँवरो सुमरण, साँवरो ध्याण धराँ री।
ज्याँ ज्याँ चरण धरणाँ धरती धर, त्याँ त्याँ निरत कराँरी।
मीराँ रे प्रभु गिरधर नागर कुंजा गैल फिराँरी।।

(सामरिया=श्यामवर्ण श्रीकृष्ण, निरत=नृत्य,नाच)



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