बदन चन्द परकातत हेली, मन्द मनद मुसकाय। लोग कुटुम्बी बरजि बरजहीं, मानस पर हाथ गये बिकाय। भली कहो कोई बुरी कहो, मैं सब लई सीस चढ़ाय। मीराँ प्रभु गिरधर लाल बिनु, पल भर रह्यौ न जाय।। (बहुरि=फिर, हेली=सखी, सब लई सीस चढ़ाय= शिरोधार्य कर लिया,स्वीकार कर लिया)
--------------------------- नहिं भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो॥ थांरा देसा में राणा साध नहीं छै, लोग बसे सब कूड़ो। गहणा गांठी राणा हम सब त्यागा, त्याग्यो कररो चूड़ो॥ काजल टीकी हम सब त्याग्या, त्याग्यो है बांधन जूड़ो। मीरा के प्रभु गिरधर नागर बर पायो छै रूड़ो॥