कौन भरे जल जमुना। सखीको०॥ध्रु०॥ बन्सी बजावे मोहे लीनी। हरीसंग चली मन मोहना॥१॥ शाम हटेले बडे कवटाले। हर लाई सब ग्वालना॥२॥ कहे मीरा तुम रूप निहारो। तीन लोक प्रतिपालना॥३॥
करूं मैं बनमें गई घर होती। तो शामकू मनाई लेती॥ध्रु०॥ गोरी गोरी बईमया हरी हरी चुडियां। झाला देके बुलालेती॥१॥ अपने शाम संग चौपट रमती। पासा डालके जीता लेती॥२॥ बडी बडी अखिया झीणा झीणा सुरमा। जोतसे जोत मिला लेती॥३॥ कहे प्रभु गिरिधर नागर। चरनकमल लपटा लेती॥४॥