शिवरात्रि की आरती भजन
शिवरात्रि की आरती भजन
आ गई महाशिवरात्रि पधारो शंकरजीहो पधारो शंकर जी आरती उतारें
पार उतारो शंकरजी हो उतारो शंकर जी
तुम नयन नयन में हो, मन धाम तेरा
हे नीलकंठ है कंठ, कंठ में नाम तेरा
हो देवों के देव, जगत में प्यारे शंकर जी
तुम राज महल में, तुम्ही भिखारी के घर में
धरती पर तेरा चरण, मुकुट है अम्बर में
संसार तुम्हारा एक हमारे शंकर जी
तुम दुनिया बसाकर, भस्म रमाने वाले हो
पापी के भी रखवाले, भोले भाले हो
दुनिया में भी दो दिन तो गुजारो शंकर जी
क्या भेट चदाये, तन मैला वर सुना
ले लो आंसू के गंगाजल का हैं नमूना
आ करके नयन में चरण पखारो शंकर जी
Aa Gayi Mahaashivratri Padhaaro Shankar ji - Shivratri (1954) Asha, Chitragupt, GS Nepali
सुन्दर भजन में श्रीमहादेवजी की दिव्यता और उनकी असीम कृपा का उदगार है। महाशिवरात्रि का यह पावन अवसर भक्तों के लिए अनोखी भक्ति और आध्यात्मिक जागरण की अनुभूति लेकर आता है। उनके आगमन का आह्वान भक्तों के हृदय में प्रेम और श्रद्धा की लहर उत्पन्न करता है।
शिवजी के विराट स्वरूप में सृष्टि का अनंत विस्तार समाहित है। वे राजा के महल में भी हैं, और भिक्षुक के झोपड़े में भी। उनकी उपस्थिति सभी सीमाओं से परे है, जहाँ वे भस्म रमाने वाले योगी भी हैं और संसार के पालनकर्ता भी। उनकी करुणा सभी के लिए समान रूप से प्रवाहित होती है, जिससे भक्तों को उनके चरणों में आश्रय प्राप्त होता है।
महादेवजी का नीलकंठ रूप जीवन के विष को आत्मसात करने और संसार को अमृत प्रदान करने का प्रतीक है। उनकी आराधना से मन में निर्भयता उत्पन्न होती है, और आत्मा शिव तत्व को आत्मसात कर परम शांति और आनंद का अनुभव करती है।
शिवजी की कृपा से भक्तों को उनके चरणों में समर्पण का दिव्य अवसर प्राप्त होता है। उनका भस्म रमाना, तांडव करना, और सृष्टि के हर कण में व्याप्त होना, यह सब उनकी अनंत लीला का हिस्सा है। भक्त अपने अश्रु और श्रद्धा से उनकी आरती उतारते हैं, और उनकी उपासना से जीवन में संतोष और भक्ति का प्रकाश फैलता है।
महाशिवरात्रि का यह पर्व आत्मा को शिव तत्व में लीन करने का अवसर है। उनके चरणों में समर्पण से मन निर्मल और निश्चल हो जाता है, और उनकी कृपा से जीवन का समस्त भार हल्का हो जाता है। शिवजी की भक्ति से आत्मा मोक्ष और मंगलमय अनुभूति की ओर अग्रसर होती है।