मोटा मोटा राक्षसां की नींद उड़ा दी रे भजन
मोटा मोटा राक्षसां की नींद उड़ा दी रे भजन
सुमिरण करके श्री गणेश का,माँ शारद को रहे मनाय,
मात सरस्वती वीणा धारिणी,
भूले अक्षर देओ बताय,
मोटा मोटा राक्षसा की नींद उड़ा दी रे,
वारे बजरंग बाला जी तूने लंका जला दी रे।
रावण लग्यो राम चन्द्र जी की नारी या सीता,
जाकर मारया राक्षसा ने ज्यो फोड़ दिया पपीता॥
रावण की सेना की हनुमत नींद उड़ा रे,
वारे बजरंग बाला जी तूने लंका जला दी रे॥
सात समुद्र कूद बाला जी लंका माही आयो,
सारी लंका माही घर विभीषण को बचायो॥
विभीषण के घर राम जी अलख जगा दी रे,
वारे बजरंग बाला जी तूने लंका जला दी रे॥
अक्षय कुमार ने मार गिरायो वाटिका उजाड़ी,
जा रावण की सभा मायने सारी शान बिगड़ी॥
रावण ने समजाबा ने मंदोदरी आगी रे,
वारे बजरंग बाला जी तूने लंका जला दी रे॥
रावण मार सिया राम घर आये घर घर बंटे बधाई,
एक रात में पासो पलट्यो लंका धूल उड़ाई॥
चम्पा लाल प्रजापति थाकि महिमा सुनाई रे,
वारे बजरंग बाला जी तूने लंका जला दी रे॥
मोटा मोटा रक्षा की तो नींद उड़ा दी रे वारे मारा बालाजी तूने लंका जला दी रे
हनुमान जी गणेश जी का सुमिरन कर माँ सरस्वती को मनाते हुए अक्षर भूलने न देते, राक्षसों की नींद उड़ा दी। सात समुद्र लाँघ लंका पहुँच विभीषण बचाए, राम नाम का अलख जगाया। अक्षयकुमार गिराया, वाटिका उजाड़ सभा में शान बिगाड़ी—रावण-मंदोदरी आग लगवाई। इश्वर का आशीर्वाद ही लंका जला देता है।
रावण सीता हर लाया तो राम जी विपदा में—हनुमत ने नींद उजाड़ राक्षसों को चूर किया। एक रात में पासा पलटा, लंका धूल उड़ा दी, घर-घर बधाई बंटी। चम्पा लाल ने महिमा सुनाई। आप सब पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री हनुमान जी की।
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