अगर माँ को दिल में बसाया ना होता भजन

अगर माँ को दिल में बसाया ना होता भजन


अगर माँ को दिल में,
बसाया ना होता,
तो माता ने हमको,
बुलाया ना होता,
चरण में सदा सिर,
झुकाया ना होता,
तो अपना हमें माँ,
बनाया ना होता।

माँ की कृपा थोड़ी,
जिस पर हो जाए,
उसे क्या कमी होगी,
सब कुछ वो पाए,
अगर माँ करिश्मा,
दिखाया ना होता,
तो माता ने हमको,
बुलाया ना होता,
चरण में सदा सिर,
झुकाया ना होता,
तो अपना हमें माँ,
बनाया ना होता।

एकांत में जिसने,
तुम्हें माँ पुकारा,
उसने ही देखा है,
अद्भुत नजारा,
आँखों से आँसू,
बहाया ना होता,
तो माता ने हमको,
बुलाया ना होता,
चरण में सदा सिर,
झुकाया ना होता,
तो अपना हमें माँ,
बनाया ना होता।

शरण आ गया हूँ,
मैं माँ तुम्हारे,
भूल भूलकर पाप,
मिटा दे माँ सारे,
अगर पापी का पाप,
मिटाया ना होता,
तो माता ने हमको,
बुलाया ना होता,
चरण में सदा सिर,
झुकाया ना होता,
तो अपना हमें माँ,
बनाया ना होता।

अगर माँ को दिल में,
बसाया ना होता,
तो माता ने हमको,
बुलाया ना होता,
चरण में सदा सिर,
झुकाया ना होता,
तो अपना हमें माँ,
बनाया ना होता।



।।अगर मां को दिल में बसाया न होता।। Agar maa ko dil me basaya na।। #देवीगीत।। संगीत पांडेय प्रयागराज

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दिल में माँ को बसाने से वे बुलावा देती हैं, चरणों में सिर झुकाने का सौभाग्य मिलता है और अपना बना लेती हैं। थोड़ी कृपा से सारी कमी दूर हो जाती है, करिश्मा दिखाकर सब कुछ प्रदान कर देती हैं। एकांत में पुकारने वाले अद्भुत दर्शन पाते हैं, आंसू बहाने से पुकार सुन ली जाती है। पापी शरणागत होकर पाप मिटाने को आता है, माँ क्षमा बरसाकर शुद्ध कर देती हैं।

माँ का महात्म्य अनुपम है, दिल में बसने से साधक को चरणों का अधिकार मिल जाता है। कृपा की ज्योति से जीवन पूर्ण हो जाता है, पाप नष्ट होकर शुद्धि प्राप्त होती है। करुणामयी माँ पुकार सुनकर बुलाती हैं, शरण में आनेवाले को अपना बना लेती हैं।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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