रानी राधा का दिल तोड़ गये कन्हैया भजन
रानी राधा का दिल तोड़ गये कन्हैया भजन
रानी राधा का दिल,
तोड़ गए कन्हैया।।
ऐ री सखी मनमोहन तो,
मुरली को बजा के चले गए,
मैं सोई थी सुख निदिया में,
वो मुझे जगा के चले गए,
मैंने कहा प्रभु ठहरिए तो,
वो सिर को हिला कर चले गए,
उनको तो सूझी वही हंसी,
वो मुझे रुला कर चले गए।।
कंधे पे काली कंबल,
ओढ़ गए कन्हैया,
रानी राधा का दिल,
तोड़ गए कन्हैया,
रोते और बिलखते हमको,
छोड़ गए कन्हैया।।
वेदना सही ना जाए,
विरह ने जला है,
श्याम के बिना ब्रज लगे,
हमें सूना~सूना है,
कौन सी खता पे मुखड़ा,
मोड़ गए कन्हैया,
रानी राधा का दिल,
तोड़ गए कन्हैया।।
आज श्याम प्यारे ये,
नैना थक गए हैं,
राह देखते~देखते,
ये पलकें थक गए हैं,
कहानी में कैसा मोड़,
दे गए कन्हैया,
रानी राधा का दिल,
तोड़ गए कन्हैया।।
कंधे पे काली कंबल,
ओढ़ गए कन्हैया,
रानी राधा का दिल,
तोड़ गए कन्हैया,
रोते और बिलखते हमको,
छोड़ गए कन्हैया।।
तोड़ गए कन्हैया।।
ऐ री सखी मनमोहन तो,
मुरली को बजा के चले गए,
मैं सोई थी सुख निदिया में,
वो मुझे जगा के चले गए,
मैंने कहा प्रभु ठहरिए तो,
वो सिर को हिला कर चले गए,
उनको तो सूझी वही हंसी,
वो मुझे रुला कर चले गए।।
कंधे पे काली कंबल,
ओढ़ गए कन्हैया,
रानी राधा का दिल,
तोड़ गए कन्हैया,
रोते और बिलखते हमको,
छोड़ गए कन्हैया।।
वेदना सही ना जाए,
विरह ने जला है,
श्याम के बिना ब्रज लगे,
हमें सूना~सूना है,
कौन सी खता पे मुखड़ा,
मोड़ गए कन्हैया,
रानी राधा का दिल,
तोड़ गए कन्हैया।।
आज श्याम प्यारे ये,
नैना थक गए हैं,
राह देखते~देखते,
ये पलकें थक गए हैं,
कहानी में कैसा मोड़,
दे गए कन्हैया,
रानी राधा का दिल,
तोड़ गए कन्हैया।।
कंधे पे काली कंबल,
ओढ़ गए कन्हैया,
रानी राधा का दिल,
तोड़ गए कन्हैया,
रोते और बिलखते हमको,
छोड़ गए कन्हैया।।
रानी राधा का दिल तोड़ गए कन्हैया | Rani Radha Ka Dil Tod Gaye Kanhiya | Ladla Mohit Official
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कभी‑कभी वही प्रेम जो जीवन भर सीखता है, दर्द भी देकर जाता है। जब रानी राधा के लिए शाम का वही मुरलीवाला श्याम चुपके से कंधे पर काली कंबल ओढ़कर चल देता है, तो दिल टूटने लगता है, आँखें भर आती हैं। राह देखते‑देखते पलकें थक जाती हैं, किन्तु वह जिसकी उम्मीद है, वही सबसे अधिक मार जाता है। विरह की वेदना इतनी तेज़ होती है कि ब्रज भी सूना‑सूना लगने लगता है। जय श्री राधे जी। जय श्री कृष्ण जी।
यहीं यह भी उभरता है कि क्या ज़िन्दगी में कभी पूरा बदला मिलता है, या बस अनाथ छूट जाते हैं; लेकिन फिर भी दिल उसी श्याम के लिए दुआएँ सुनाता है जिसने छोड़कर चला गया है। कंबल ओढ़ कर जाने वाले को भी कोई बात नहीं दिखती, तो भोगता रहता है वही जो उसके पीछे रह गया है। उसी का दृश्य यह बताता है कि प्रेम में जीत हमेशा साथ रहने से नहीं, बल्कि विश्वास और यादों में जीने से मिलती है। इश्वर का आशर्वाद हम सब पर बना रहे, यही विरह की वेदना दिल को भी गहरा और विश्वासी बनाती रहे। जय श्री राधे जी। जय श्री कृष्ण जी।
यहीं यह भी उभरता है कि क्या ज़िन्दगी में कभी पूरा बदला मिलता है, या बस अनाथ छूट जाते हैं; लेकिन फिर भी दिल उसी श्याम के लिए दुआएँ सुनाता है जिसने छोड़कर चला गया है। कंबल ओढ़ कर जाने वाले को भी कोई बात नहीं दिखती, तो भोगता रहता है वही जो उसके पीछे रह गया है। उसी का दृश्य यह बताता है कि प्रेम में जीत हमेशा साथ रहने से नहीं, बल्कि विश्वास और यादों में जीने से मिलती है। इश्वर का आशर्वाद हम सब पर बना रहे, यही विरह की वेदना दिल को भी गहरा और विश्वासी बनाती रहे। जय श्री राधे जी। जय श्री कृष्ण जी।
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Author - Saroj Jangir
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