मुखडानी माया लागी मीरा बाई भजन
मुखडानी माया लागी मीरा बाई भजन
मुखडानी माया लागी रे
मोहन प्यारा।
मुघडुं में जियुं तारूं सव जग थयुं खारूं
मन मारूं रह्युं न्यारूं रे।
संसारीनुं सुख एबुं झांझवानां नीर जेवुं
तेने तुच्छ करी फरी रे।
मीराबाई बलिहारी आशा मने एक तारी
हवे हुं तो बडभागी रे।
मोहन प्यारा।
मुघडुं में जियुं तारूं सव जग थयुं खारूं
मन मारूं रह्युं न्यारूं रे।
संसारीनुं सुख एबुं झांझवानां नीर जेवुं
तेने तुच्छ करी फरी रे।
मीराबाई बलिहारी आशा मने एक तारी
हवे हुं तो बडभागी रे।
Mukhadaanee Maaya Laagee Re
Mohan Pyaara.
Mughadun Mein Jiyun Taaroon Sav Jag Thayun Khaaroon
Man Maaroon Rahyun Nyaaroon Re.
Sansaareenun Sukh Ebun Jhaanjhavaanaan Neer Jevun
Tene Tuchchh Karee Pharee Re.
Meeraabaee Balihaaree Aasha Mane Ek Taaree
Have Hun To Badabhaagee Re.
मुखडानी माया लागी रे, मोहन प्यारा bhajan on Harmonium by Narendra Shukla
यह मीराबाई का प्रसिद्ध भजन है, जिसमें वे कहती हैं कि हे प्रिय मोहन (कृष्ण), तुम्हारे मुखड़े (चेहरा) की माया (आकर्षण/प्रेम) मुझे लग गई है। तुम्हारे मुख को देखते ही मेरा मन इतना मोहित हो गया कि सारा संसार मुझे फीका और खारा (निरस/बेकार) लगने लगा, मेरा मन अब संसार से अलग-थलग होकर केवल तुममें ही रमा रहता है। संसार का सुख तो मृगतृष्णा (मृग-तृष्णा, मरुस्थल में पानी का भ्रम) जैसा छलावा है, जो व्यर्थ है—इसे मैंने तुच्छ समझकर त्याग दिया और अब घूम रही हूँ। मीराबाई कहती हैं कि मैं तुम्हारी एकमात्र आशा पर बलिहारी हूँ, अब मैं बहुत बड़भागी (सौभाग्यशाली) हो गई हूँ।
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