तू दयालु दीन मैं तू दानी मैं भिखारी भजन

तू दयालु दीन मैं तू दानी मैं भिखारी


तू दयालु दीन मैं तू दानी मैं भिखारी,
मैं प्रसिद्ध पातकी तू पाप पुंज हारी,
तू दयालु दीं मैं तू दानी मैं भिखारी,

नाथ तू अनाथ को अनाथ कौन मोसो ,
मो समान आरत नाही
मोह समान आरत नाही आरती हर तू सो,
तू दयालु दीन मैं तू दानी मैं भिखारी,

बह्मा तू जीव मैं तू ठाकुर मैं चेरो,
तात मात गुरु सखा तू सब विधि है तू विरोध,
तू दयालु दीन मैं तू दानी मैं भिखारी

तू ही मोहे नाते अनके मानिये जो भावे,
जो त्यों तुलसी किरपाल चरण शरण पावे,
तू दयालु दीन मैं तू दानी मैं भिखारी



गुरुवार Special भजन I तू दयालु दीन मैं I Tu Dayalu Deen Main I Hari Bhajan I Full HD Video Song
 Hari Bhajan: Tu Dayalu Deen Main
Singer: Anuradha Paudwal
Music Director: Arun Paudwal
Lyrics: Traditional
Album: Vishnu Stuti
Music Label: T-Series
 
तू दयालु है, मैं दीन हूं। तू दानी है, मैं भिखारी हूं। मैं पापों का प्रसिद्ध ढेर हूं, तू पापों का पूरा समूह हर लेने वाला है। नाथ, मैं अनाथ हूं, अनाथ का और कौन सहारा है मुझसे बढ़कर। मेरे जैसा दुखी और कोई नहीं, मेरे दुख को हरने वाला भी तू ही है। ब्रह्मा तू है, मैं जीव हूं। तू ठाकुर है, मैं चेरो हूं। तू ही माता, पिता, गुरु और सखा है। हर तरह से तू ही मेरे साथ है, फिर भी मैं विरोधी स्वभाव वाला हूं। तू ही मेरे नाते-रिश्ते बनाता है, जैसा भाव रखूं वैसा मान लेता है। तुलसी कहता है – किरपालु, जो तेरी चरण शरण में आ जाता है, उसे सब कुछ मिल जाता है। तेरी दया और किरपा के बिना यह भिखारी कुछ भी नहीं। बस तेरी शरण में रहने दो, पाप हर लो और इस दीन को अपना बना लो। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राम जी की। 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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