अनूप जलोटा भजन रे मन हरी सुमिरन भजन

अनूप जलोटा भजन रे मन हरी सुमिरन भजन

 
रे मन हरी सुमिरन कर लीजे Anup Jalota Bhajan Re Man Hari Sumiran Kar Lije Lyrics

रे मन हरी सुमिरन कर लीजे
हरी सुमिरन कर लीजे
रे मन हरी सुमिरन कर लीजे
हरी को नाम प्रेम सु जपिए
हरी रस रसना पीजे
हरी गुण गाइए निरंतर
हरी चरनन चित्त दीजे
रे मन हरी सुमिरन कर लीजे
रे मन हरी सुमिरन कर लीजे
हरी भक्तन की शरण ग्रहण करी
हरी संग प्रीत करिजे
हरी सम हरिजन
समुजी मन
तिनको सेवन कीजे
रे मन हरी सुमिरन कर लीजे
रे मन हरी सुमिरन कर लीजे
हरी कही विधि सो हमसो रीझे
सो ही प्रश्न करिजे
हरिजन हरी मार्ग पर ही चाले
अनुमति देहि सो कीजे
रे मन हरी सुमिरन कर लीजे
रे मन हरी सुमिरन कर लीजे

रे मन हरि सुमिरन कर लीजे | Re Mann Hari Sumiran Kar Leeje | Krishna Bhajan | Krishna Song

Singer: Anup Jalota
Music: Appa Vaidavkar
Music Label: Wings Music 
© & ℗ Wings Entertainment Ltd
 

मन को हरि का नाम सुमिरन करने दो, प्रेम से जप लो निरंतर। रसना पर वो स्वाद चढ़ा दो, गुण गाते रहो दिन-रात। चित्त चरणों में समर्पित कर दो, भक्ति का रंग घोल दो जीवन में। हरि भक्तों की शरण लेते हैं, उनके संग प्रीत जोड़ लो। हरिजनों का सेवन करो, मन समुझाओ हरि के पास। साधक को ये राह दिखती है कि हरि की कही विधि ही अपनाओ। जय श्री हरि जी।

हरि मार्ग पर चलते हरिजन, उनकी अनुमति से ही कदम बढ़ाओ। रीझ जाते हैं हरि सच्चे प्रश्न पर, बस मन को लगा दो सुमिरन में। ये सुमिरन जीवन को रंगीन बना देता है, हर पल आनंद बरसता है। इश्वर का आशर्वाद हम सब पर बना रहे, ये नामजप दिल को हमेशा शांति देता रहे। जय श्री हरि जी।

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