जिह्ना दियां रोज रोज फसल उजाड़ियाँ भजन
जिह्ना दियां रोज रोज फसल उजाड़ियाँ भजन
जिह्ना दियां रोज रोज फसल उजाड़ियाँ,
घर घर मच गई दुहाई जोगियां,
मैं ता माता गौआ जंगला दे विच चरियाँ,
किसे दी न फसल उजाड़ी,
पिंड दे लोका ने शिकायता ठाणे विच कीतियां,
पुलिस तलाइयाँ विच आई,
ता की होया पिंड विच ठाणे दार आ गया,
तू कहनु गबराई माये मेरिये,
ओहना तनु मारना यहां तनु कूटना,
जान मेरी मुठी विच आई,
रख ले तू उस भगवान उते डोरियाँ,
जिहने तेरा होना है सहाई
घर घर मच गई दुहाई जोगियां,
मैं ता माता गौआ जंगला दे विच चरियाँ,
किसे दी न फसल उजाड़ी,
पिंड दे लोका ने शिकायता ठाणे विच कीतियां,
पुलिस तलाइयाँ विच आई,
ता की होया पिंड विच ठाणे दार आ गया,
तू कहनु गबराई माये मेरिये,
ओहना तनु मारना यहां तनु कूटना,
जान मेरी मुठी विच आई,
रख ले तू उस भगवान उते डोरियाँ,
जिहने तेरा होना है सहाई
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