जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे भजन
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे भजन
(मुखड़ा)
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
और जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जय जय माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ,
मेरी माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ।।
(अंतरा)
एक तेरे भरोसे पर मैंने,
अपनी ये नाव चलाई है,
लाखों तूफान आए लेकिन,
मेरी नाव ने मंज़िल पाई है,
मेरी नाव ने मंज़िल पाई है।
हाथों से तेरे मेरी पतवार ना छूटे,
और जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जय जय माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ,
मेरी माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ।।
जब-जब भी ठोकर खाकर मैं,
चलते-चलते गिर जाता हूँ,
उस वक्त भी अपने पास खड़ी,
मेरी मैया तुम्हें ही पाता हूँ।
तुझसे जुड़ी जो तार,
कभी वो तार ना टूटे,
और जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जय जय माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ,
मेरी माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ।।
बस एक तमन्ना जीवन की,
हर जनम में तेरा साथ मिले,
हर हाल में मैं खुश रह लूँगा,
गर मैया तेरा प्यार मिले।
माँ के नाम की मस्ती,
किस्मत वाला लूटे,
और जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जय जय माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ,
मेरी माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ।।
(अंतिम पुनरावृति)
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
और जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जय जय माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ,
मेरी माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ।।
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
और जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जय जय माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ,
मेरी माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ।।
(अंतरा)
एक तेरे भरोसे पर मैंने,
अपनी ये नाव चलाई है,
लाखों तूफान आए लेकिन,
मेरी नाव ने मंज़िल पाई है,
मेरी नाव ने मंज़िल पाई है।
हाथों से तेरे मेरी पतवार ना छूटे,
और जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जय जय माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ,
मेरी माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ।।
जब-जब भी ठोकर खाकर मैं,
चलते-चलते गिर जाता हूँ,
उस वक्त भी अपने पास खड़ी,
मेरी मैया तुम्हें ही पाता हूँ।
तुझसे जुड़ी जो तार,
कभी वो तार ना टूटे,
और जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जय जय माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ,
मेरी माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ।।
बस एक तमन्ना जीवन की,
हर जनम में तेरा साथ मिले,
हर हाल में मैं खुश रह लूँगा,
गर मैया तेरा प्यार मिले।
माँ के नाम की मस्ती,
किस्मत वाला लूटे,
और जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जय जय माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ,
मेरी माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ।।
(अंतिम पुनरावृति)
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
और जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जग रूठे पर मुझसे मेरी माँ ना रूठे,
जियूँ मैं जब तक,
माँ तेरा दरबार ना छूटे।
जय जय माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ,
मेरी माँ माँ माँ,
जय जय माँ माँ माँ।।
Jag ruthe par mujhse meri maa na ruthe