परम मनोहर गोकुल गाम भजन
परम मनोहर गोकुल गाम भजन
श्री विठ्ठलनाथजी की बधाई
राग बिलावल
परम मनोहर गोकुल गाम।।
प्रकटे श्रीविठ्ठल पुरुषोत्तम पतित पावन बिरुदहे नाम।।1।।
नंदनंदन श्रीवल्लभ नंदन श्रुति भागवत भूषण अभिराम।।
चौदह लोकतें अधिक अधिक छबि नित्य विहार व्रज वैकुंठ धाम।।2।।
आनंद कोटि विमल यश गावत डाता सदां सकल सुख काम।।
सगुनदास प्रभु श्रीविठ्ठल के मन कर्म वचन चरण विश्राम।।3।।
राग बिलावल
परम मनोहर गोकुल गाम।।
प्रकटे श्रीविठ्ठल पुरुषोत्तम पतित पावन बिरुदहे नाम।।1।।
नंदनंदन श्रीवल्लभ नंदन श्रुति भागवत भूषण अभिराम।।
चौदह लोकतें अधिक अधिक छबि नित्य विहार व्रज वैकुंठ धाम।।2।।
आनंद कोटि विमल यश गावत डाता सदां सकल सुख काम।।
सगुनदास प्रभु श्रीविठ्ठल के मन कर्म वचन चरण विश्राम।।3।।
श्री गुसाँईजी जी के जन्म उत्सव के अवसर पर श्री गुसाँईजी की बधाई के पद गाना आरम्भ हो जाते है। इसी अवसर पर गाये जाने वाले पदों में से यह एक पद है।
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