बन्धु काहे अकड़ता है रे बन्धु भजन

रे बन्धु काहे अकड़ता है रे बन्धु काहे झगड़ता भजन

 
रे बन्धु काहे अकड़ता है रे बन्धु काहे झगड़ता है  Re Bandhu Kahe Akadata Hai Re Bandhu Lyrics

रे बन्धु काहे अकड़ता है रे बन्धु काहे झगड़ता है,
माया मीत किसी के नहीं क्यूँ, इसमें उलझता है,

माया से ही लोभ हैं उपजे, माया का है खेल,
माया ने सब जाल बिछाया , जीवन बन गया जेल,
मोह माया और ममता के क्यूँ, पीछे पड़ता है,

माया के ही रूप हैं सारे, धन जोबन संतान,
माया पाश भयंकर इसने, बंधा हर इंसान,
दुःख का बोझ बने ये सारे,
दुःख का बोझ बने ये सब क्यूँ ,इनमें उलझता है,

आज नहीं तो कल माया तुझको धोखा दे जाएगी,
जिसके पीछे इतराता है, एक दिन हाथ छुड़ाएगी,
साँची कहे बमनावत रे क्यूँ , मूरख बनता है,


Nirgun Bhajan- Re Bandhu
 
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Nirgun Bhajan- Re Bandhu by ajay kapil
Composed by - Ajay Kapil
Singer - Ajay Kapil
lyrics- kishan bamnawat
 
यह संसार माया का जाल है, जो धन, यौवन और संतान के रूप में मन को मोहित करता है, परंतु यह सब क्षणभंगुर है और अंत में केवल दुख का बोझ बन जाता है। माया के इस खेल में लोभ और मोह के कारण मनुष्य अहंकार और झगड़ों में उलझता है, जिससे उसका जीवन जेल के समान बन जाता है। यह रचना सिखाती है कि माया के पीछे भागने वाला व्यक्ति सत्य से दूर हो जाता है और अपने जीवन को व्यर्थ के बंधनों में जकड़ लेता है। साधक को चाहिए कि वह माया के इस भ्रम को पहचाने और उससे मुक्त होने का प्रयास करे।

माया का यह पाश हर इंसान को बाँधता है, परंतु जो साधक सच्चे मन से इसकी नश्वरता को समझ लेता है, वह इसके भयंकर जाल से बच निकलता है। बमनावत की साँची बात यह है कि माया आज नहीं तो कल धोखा दे ही जाएगी, और जिसके पीछे मनुष्य इतराता है, वह एक दिन उसका साथ छोड़ देगी। अतः, अहंकार और झगड़ों को त्यागकर, माया के मोह को छोड़कर साधक को प्रभु के सत्य मार्ग पर चलना चाहिए। यह सत्य का मार्ग ही उसे दुखों से मुक्ति दिलाता है और जीवन को सार्थक बनाता है, क्योंकि माया में उलझने से केवल पछतावा ही हाथ लगता है। 
 
मनुष्य, तू क्यों अहंकार और झगड़ों में फंसा हुआ है? यह माया (सांसारिक मोह और धन) किसी की सच्ची मित्र नहीं होती, फिर भी तू इसी में उलझा रहता है। यह भजन हमें समझाता है कि लोभ और लालच इसी माया से उत्पन्न होते हैं, और इसी कारण जीवन एक कारागार जैसा बन जाता है। धन, जवानी, और संतान ये सब माया के ही अलग-अलग रूप हैं। हर इंसान इस माया के भयंकर जाल में फंसा हुआ है और इसी कारण वह दुखों का बोझ ढोता है। भजन के अंतिम पद में चेतावनी दी गई है कि यह माया आज नहीं तो कल तुम्हें धोखा देगी और जिसका तू घमंड करता है, वह सब एक दिन तुझे छोड़कर चला जाएगा। मूर्ख बनकर इस नश्वर माया के पीछे मत पड़ो और जीवन की वास्तविकता को समझो। 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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