श्रद्धा भक्ति हो गर मन में बोलते हैं पत्थर

श्रद्धा भक्ति हो गर मन में बोलते हैं पत्थर भी भजन

 
श्रद्धा भक्ति हो गर मन में बोलते हैं पत्थर भी Shradha Bhakti Ho Gar Me Bolte Hain Lyrics

श्रद्धा भक्ति हो गर मन में , बोलते हैं पत्थर भी,
जिन पर लिख दें नाम राम का , तैरते हैं पत्थर भी,

गौतम ऋषि के श्राप से देवी अहिल्या पथराई,
मुक्त श्राप कर दीनी , ऐसी किरपा करी रघुराई,
बनकर सुन्दर नारी देखो , पकडे चरण पत्थर भी,

हरिण कश्यप दानव जब खुद बन बैठा भगवान,
तब प्रहलाद के रूप में जन्में , परम भक्त संतान,
सुनकर विनती भक्त की भगवन , चीरते हैं पत्थर भी,

एक ब्राह्मण ने धन्ना भगत को ऐसा मुर्ख बनाया,
सिल का बटना देकर उसको सालिगराम बताया,
कहे बमनावत भोग लगाये , भक्ति से पत्थर भी,
श्रद्धा भक्ति हो गर मन में , बोलते हैं पत्थर भी,
जिन पर लिख दें नाम राम का , तैरते हैं पत्थर भी,
 

Shradhha Bhakti //Nigun Bhajan //ajay kapil // Kapil Bhajan Mala
 
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राम नाम की महिमा और सच्ची श्रद्धा-भक्ति की शक्ति अनंत है, जो पत्थरों को भी बोलने और तैरने की शक्ति प्रदान करती है। यह भक्ति वह बल है जो असंभव को संभव बनाती है, चाहे वह अहिल्या का शापमुक्त होना हो, प्रहलाद की रक्षा के लिए भगवान का प्रकट होना हो, या धन्ना भगत की निश्छल भक्ति से सिल के बटने में प्रभु का साकार होना हो। यह रचना सिखाती है कि सच्चे हृदय से राम का नाम लेने वाला भक्त हर बाधा को पार कर सकता है।

जब मन में श्रद्धा और भक्ति का दीप जलता है, तब पत्थर जैसी कठोर वस्तु भी प्रभु की कृपा से जीवंत हो उठती है। गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बनी अहिल्या को श्री राम ने अपनी करुणा से मुक्त कर सुंदर नारी रूप प्रदान किया, जिससे वह उनके चरणों में नतमस्तक हो गई। प्रहलाद जैसे भक्त की विनती पर प्रभु नरसिंह रूप में प्रकट हुए और पत्थर के खंभे को चीरकर दानव का अंत किया। इसी तरह, धन्ना भगत की साधना ने सिल के पत्थर को सालिगराम बना दिया, क्योंकि उनकी भक्ति में वह शक्ति थी जो प्रभु को प्रकट करती है। यह भक्ति का बल है जो साधक को संसार की हर कठिनाई से उबारता है।

सच्ची भक्ति वह है जो बिना किसी शंका के प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण रखती है। धन्ना भगत की तरह निश्छल मन से भोग लगाने वाला भक्त पत्थर में भी प्रभु को देख लेता है। राम नाम का स्मरण ऐसा रस है जो भक्त के हृदय को प्रभु से जोड़ता है और उसे भवसागर से पार लगाता है। जो साधक श्रद्धा और भक्ति से राम का नाम जपता है, वह न केवल अपने जीवन को पवित्र बनाता है, बल्कि असंभव को भी संभव कर दिखाता है। अतः, अपने हृदय में राम नाम का दीप जलाओ, क्योंकि यही वह शक्ति है जो पत्थर को तैराती है और भक्त को प्रभु के चरणों तक पहुँचाती है।
 
यदि मन में सच्ची श्रद्धा और भक्ति हो, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। कविता में पत्थर के तैरने, गौतम ऋषि के श्राप से अहिल्या के पत्थर से स्त्री बनने, प्रहलाद की भक्ति से भगवान द्वारा खंभे से प्रकट होने, और धन्ना भगत की सच्ची भक्ति से पत्थर के भगवान बन जाने के उदाहरणों के माध्यम से यही बात समझाई गई है। ये सभी घटनाएँ इस बात का प्रमाण देती हैं कि ईश्वर की कृपा केवल तभी मिलती है जब मन में दृढ़ विश्वास और सच्ची लगन हो, और यह विश्वास ही है जो जड़ वस्तुओं को भी जीवंत कर देता है। 
 
Bhajan- Shraddha Bhakti
Composition - Ajay Kapil
Singer and Music- Ajay Kapil
Lyricist- Kishan Bamnawat
 
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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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