छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी गोवर्धन महाराज भजन
गोवर्धन महाराज, हमारे प्रभु,
गोवर्धन महाराज,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है,
गोवर्धन महाराज।
मानसी मानसी गंगा को असनान,
धरो फिर चकलेश्वर को ध्यान,
दान घाटी में दही को दान,
करो परिक्रमा की तैयारी है,
गोवर्धन महाराज,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है,
गोवर्धन महाराज।
इंद्र को मन मर्दन कीन्हो,
डूबत बृज को बचाय लीन्हो,
प्रकट भये है दर्शन दीन्हो,
श्री नटवर की महिमा न्यारी है,
गोवर्धन महाराज,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है,
गोवर्धन महाराज।
भक्त जन पड़े रहे चहुँ और,
संतजन पड़े रहे चहुँ और,
देख के ध्यान धरे नित घोर,
शिखर के ऊपर नाचत मोर,
कर रहे हैं बृज की रखवारी है,
गोवर्धन महाराज,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है,
गोवर्धन महाराज।
धन्य जो बात करें गिरिराज,
सिद्ध हो उनके बिगरे काज,
लाज भक्तन की रखे गिरिराज,
श्याम तेरे चरणन की बलिहारी है,
गोवर्धन महाराज,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है,
गोवर्धन महाराज।
मानसी गंगा श्री हरिदेव,
गिरीवर की परिक्रमा देव,
छँटा तेरी तीन लोक से न्यारी है,
गोवर्धन महाराज।
छटा तेरी तीन लोक से न्यारी है - Shree Govardhan Maharaj {Full Bhajan} #Bhakti Song
Chhanta Teri Tin Lok Se Nyaari Hai,
Govardhan Mahaaraaj.
Govardhan Mahaaraaj, Hamaare Prabhu,
Govardhan Mahaaraaj,
Chhanta Teri Tin Lok Se Nyaari Hai,
Govardhan Mahaaraaj.
गोवर्धन महाराज की छतरी तीनों लोकों से न्यारी है, जैसे कोई विशाल छत्र सब पर छाया कर दे। मानसी गंगा में स्नान, चकलेश्वर का ध्यान, दही दान और परिक्रमा की तैयारी—ये सब बृज की रक्षा का प्रतीक बन जाते हैं। इंद्र का मान मर्दन कर बरसते बृज को उठा लिया, प्रकट हो नटवर की लीला दिखाई। इश्वर का आशीर्वाद हर धार पर बरसता रहता है।
भक्त-संत चारों ओर लेटे, शिखर पर मोर नाचते, गिरिराज बृज की रखवाली करते हैं। बिगड़े काम सिद्ध होते हैं, भक्तों की लाज बचती है, श्याम चरणों की बलि चढ़ती है। साधक को लगता है जैसे हर परिक्रमा में वो निकट आ जाते हैं। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री गोवर्धन महाराज जी की।
छटा तेरी तीन लोक से न्यारी हे,
गोवर्धन महाराज,
मानसी मानसी गंगा को स्नानं करो ,
फिर चकलेश्वर को ध्यान,
दान घाटी में दही को दान ,
करो परिक्रमा तैयारी रै,
गोवर्धन महाराज।
कंस को मन मर्दन कीनो,
डूबत गज बचाई लीनो,
प्रकट प्रकट है के दरशन दीनो,
नटराज की महिमा न्यारी रै,
गोवर्धन महाराज।
सन्त जन पड़े रहे चहुँ और ,
देख के ध्यान धरे नित घोर ,
शिखर के ऊपर नाचे मोर ,
कर रहे हैं बृज की सब रखवारी रै,
गोवर्धन महाराज।
धन्य जो बात करें गिरिराज,
सिद्ध हो उनके बिगरे काज ,
लाज भक्तन की रखे गिरिराज,
श्याम तेरे चरनन की बलिहारी रै,
गोवर्धन महाराज।
➤Album :- Lagi Lagan Shyam Se
➤Song :- Chhata Teri Tin Lok Se
➤Singer :- Rajesh Lohiya
➤Music :- Sanjay Pal
➤Writer :- M.S Vairagi
➤ Label :- Vianet Media
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Author - Saroj Jangir
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