पाती पढ़के राधा के यूँ बरसे ऐसे नैन भजन
पाती पढ़के राधा के यूँ बरसे ऐसे नैन भजन
पाती लेके श्याम की,उद्धव जी गए आय,
पाती राधा के तुरंत,
दीन्हीं हाथ थमाय।
पाती पढ़ के राधा के यूँ,
पाती पढ़ के राधा के यूँ,
बरसे ऐसे नैन,
के मानो,
यमुना में बाढ़ आ गई,
यमुना में बाढ आ गई।
पढ़कर के पाती राधा रोई,
नैनन की निंदिया हाय खोई,
बोली मन मोहन के जैसा मैने,
हरज़ाई देखा नहीं कोई,
परसों की कह के बरसों बीते,
कर डाला बेचैन, के मानों,
यमुना में बाढ़ आ गई,
यमुना में बाढ आ गई।
दर्शन की मैं तो हूँ दिवानी,
सूरत कान्हाँ की मन लुभानी,
प्यारे मन मोहन ने उधो मेरी,
बिलकुल कदर ना जानी,
बिरह सतावे नींद ना आवे,
तड़पत हूँ दिन रैन, के मानों,
यमुना में बाढ़ आ गई,
यमुना में बाढ आ गई।
आएँगे जो ना साँवरिया,
लेंगे अगर ना ख़बरिया,
उधो कहना श्याम से तुम जाके,
रो रो हो जाऊँ बाँवरिया,
श्याम विरह के गीत बिजेंद्र,
लिखते लेकर पैन, के जानों,
के समझों, के मानों,
यमुना में बाढ़ आ गई,
यमुना में बाढ आ गई।
पाती पढ़ के राधा के यूँ,
पाती पढ़ के राधा के यूँ,
बरसे ऐसे नैन,
के मानो,
यमुना में बाढ़ आ गई,
यमुना में बाढ आ गई।
पाती पढ़ के राधा के || Pati Padh Ke Radha Ke || Lord Krishna Bhajan 2017
Paati Leke Shyaam Ki,
Uddhav Ji Gae Aay,
Paati Raadha Ke Turant,
Dinhin Haath Thamaay.
Paati Padhake Raadha Ke Yun,
Paati Padhake Raadha Ke Yun,
Barase Aise Nain,
Ke Maano,
Yamuna Mein Baadh Aa Gai,
Yamuna Mein Baadh Aa Gai.
विरह की आग में जलता मन जब प्रियतम के संदेश को छूता है, तो आँसुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। जैसे यमुना की लहरें बेकाबू हो उठें, वैसे ही नैनों से भावनाएँ बह निकलती हैं। बिछड़न की पीड़ा इतनी गहरी होती है कि नींद चुरा लेती है, दिन-रात तड़प जगाती है। फिर भी दर्शन की चाहत दिल को बाँधे रखती है, क्योंकि उस सूरत का जादू ऐसा है जो हर दर्द को मीठा बना देता है। इश्वर का आशीर्वाद ही इस तड़प को शांति देता है।
उधो के माध्यम से भेजा संदेश भी विरह की कथा ही कहता है, जहाँ हर पल बेचैनी बढ़ाती जाती है। प्रेमी की हरजाईयाँ भूलकर भी सच्चा प्रेम बुलाता रहता है, खबर की आस जगाता रहता है। जब बिरह सताए, तो गीत बनते हैं, जो मन की गहराई उकेरते हैं। ये भाव हमें सिखाते हैं कि सच्चा लगाव दूरी निभा लेता है, और हृदय को मजबूत बनाता है। आप सब पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कृष्ण जी की।