तुम्हे झूले में झुलाऊँगा सावन को आने दो भजन

तुम्हे झूले में झुलाऊँगा सावन को आने दो भजन

(मुखड़ा)
तुम्हे झूले में झुलाऊँगा,
सावन को आने दो,
सावन को आने दो,
सावन को आने दो।

(अंतरा 1)
अम्बुआ की हरी-भरी डारी,
डारी पे झूला डलाऊँ,
झूले में तुमको बिठा के,
धीरे-धीरे झूला झुलाऊँ।
पेंगें लगाऊँगा,
कजरी सुनाऊँगा,
झूमूँगा, गाऊँगा।
सावन को आने दो,
सावन को आने दो,
तुम्हे झूले में झुलाऊँगा,
सावन को आने दो।

(अंतरा 2)
सुख-दुख के झूले में झूले,
परिवार मेरा ये सारा,
ऐसे में कैसे सजाऊँ,
झूला, ओ मैया तुम्हारा।
जब चैन पाऊँगा,
नहीं देर लगाऊँगा,
मैं दौड़ के आऊँगा।
सावन को आने दो,
सावन को आने दो,
तुम्हे झूले में झुलाऊँगा,
सावन को आने दो।

(अंतरा 3)
झूला झुलाऊँगा तुमको,
पर ये शर्त है हमारी,
मैं तुमको भजन सुनाऊँ,
पायल बजे जब तुम्हारी।
फूलों से सजाऊँगा,
'बेधड़क' रिझाऊँगा,
दरबार में आऊँगा।
सावन को आने दो,
सावन को आने दो,
तुम्हे झूले में झुलाऊँगा,
सावन को आने दो।

(पुनरावृत्ति)
तुम्हे झूले में झुलाऊँगा,
सावन को आने दो,
सावन को आने दो,
सावन को आने दो।
 


Tumhe Jhule Mein Jhulaunga By Sheetal Pandey
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