मेरे कोई नहीं है पास रे मेरा राम चला भजन

मेरे कोई नहीं है पास रे मेरा राम चला भजन


अंधेरे में छोड़ सारा धाम जा रहा है,
रोको रे रोको मेरा नाम जा रहा है,
आंखों की ज्योति बुझाई जा रहा है,
रोको रोको मेरा राम जा रहा है,
अंधेरे में छोड़ सारा धाम जा रहा है।

मेरे कोई नहीं है पास रे,
मेरा राम चला बनवास रे,
मेरे दिल में यही है पछतावा,
मेरे जैसा ना बाप कोई अभागा,
दुखों का दामन थामे जा रहा है,
रोको रे रोको मेरा राम जा रहा है,
अंधेरे में छोड़ सारा धाम जा रहा है।

मेरी टूट गई सब आश रे,
मेरा राम चला बनवास रे,
मैंने मन में बसाया केकई को,
हे अवध की बनी दुश्मन वो,
करने कठिन वह कैसा काम जा रहा है,
रोको रे रोको मेरा राम जा रहा है,
अंधेरे में छोड़ सारा धाम जा रहा है।

मेरे कष्टों का किसे एहसास रे,
मेरा राम चला बनवास रे,
महलों का रहने वाला वन में रहेगा,
बिकता कठोर बेटा कैसे सही है,
घर-घर पुकारा जिसका नाम जा रहा है,
रोको रोको मेरा राम जा रहा है,
अंधेरे में छोड़ सारा धाम जा रहा है।

मुझको खूब हुआ एहसास रे,
मेरा राम चला बनवास है,
दिल के दुख ना जाएंगे झेले,
हो विधाता अब प्राण मेरे ले ले,
मन का मोती विन दाम बेचा जा रहा है,
रोको रे रोको मेरा राम जा रहा है,
अंधेरे में छोड़ सारा धाम जा रहा है।

भजन श्रेणी : राम भजन (Ram Bhajan)


मेरे कोई नहीं पास रे़ मेरा राम चला वनवास रे़।। MERE KOI NAHI PAS RE MERA RAM CHALA VANVAS RE।।

Title - Mat jao ram vanvaas yaad teri aayegi
Artist - Vanshika Sharma
Singer - Aarti
Banjo / Keyboard - Naresh Pahal 

दशरथ जी का दिल टूट रहा था। राम जी बनवास को जा रहे थे, और साथ में अयोध्या का सारा उजाला भी चला जा रहा था। महल अंधेरे में छूट रहा था। बाप का मन पछतावे से भर गया। केकई को मन में बिठाकर उन्होंने खुद ही अपनी खुशियों को दूर कर दिया। अब राम के बिना महल सूना लग रहा था, जैसे सारा संसार बेरंग हो गया हो।
राम जी वन की ओर बढ़ रहे थे, तो दशरथ जी की आँखों में बस यही दुख था कि उनका लाडला बेटा अब जंगलों में रहेगा। जिस राम का नाम घर-घर में गूंजता था, वही अब कठिन रास्तों पर पैदल चला जा रहा था। बाप की छाती पर बोझ बन गया था कि मैंने अपने बेटे को इतना बड़ा दुख दिया। दुखों का दामन थामे राम जा रहे थे, और पिता की आँखें रोक नहीं पा रही थीं।
जब बेटा विदा हो रहा हो तो पिता का मन कितना बेचैन हो जाता है, यह दशरथ जी के उस पल में साफ दिखता था। राम के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं रह गया था। दिल के दुख इतने गहरे थे कि प्राण निकल जाने की कामना भी मन में आने लगी। फिर भी राम का जाना रोक नहीं पाए।
ऐसे पल याद दिलाते हैं कि परिवार में एक-दूसरे का साथ कितना अनमोल होता है। छोटी-छोटी बातों में भी प्यार और समझदारी रखो तो दुख कम हो जाते हैं। राम जी की मर्यादा और पिता का प्यार आज भी दिलों को छूता है।
आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री राम जी की। 

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