साईंया वे मेरी रूह दा जानी हयौ नहीं मुख भजन
साईंया वे मेरी रूह दा जानी हयौ नहीं मुख मोड़ भजन
साईंया वे मेरी रूह दा जानी, हयौ नहीं मुख मोड़ गया वे,
हाय नि मुख मोड़ गया वे, हायओ नहीं जींद रोल गया वे,
साईंया वे मेरी रूह दा जानी।
साईं लै गया हासे रोंन न जेहड़ा दिंदा सी,
साईं मेंथो रुसेया जेहड़ा मेनू मनोंदा सी,
हाए वे मेनू फिर मनावे, हए मेनू फेर हसावे,
साईंया वे मेरी रूह दा जानी।
दे गया जींद नु बिछोड़े नाल जेहड़ा रहंदा सी,
नाल रवा गा तेरे पेहला जेहड़ा कहंदा सी,
हाए ओ वे हूँ नाल बिथावे, हाय ओ वे मेनू गल नाल लावे,
साईंया वे मेरी रूह दा जानी।
साईं मुड़ के तू आजा झलक बिख्लाई जा,
दे न दर्द बिछोड़े फेरा तू पाई जा,
हाए ओ मेरा दर्द मिटावे साईं वे हूँ फेरा पावे,
साईंया वे मेरी रूह दा जानी।
साईं मेनू फेर कदी भी रोली न,
मेरी भूल बक्शादे साथ कदी छोड़ी ना,
हायो नि हूँ मेल वदा दे सैयां वे मेनू पार लगा दे,
साईंया वे मेरी रूह दा जानी।
हाय नि मुख मोड़ गया वे, हायओ नहीं जींद रोल गया वे,
साईंया वे मेरी रूह दा जानी।
साईं लै गया हासे रोंन न जेहड़ा दिंदा सी,
साईं मेंथो रुसेया जेहड़ा मेनू मनोंदा सी,
हाए वे मेनू फिर मनावे, हए मेनू फेर हसावे,
साईंया वे मेरी रूह दा जानी।
दे गया जींद नु बिछोड़े नाल जेहड़ा रहंदा सी,
नाल रवा गा तेरे पेहला जेहड़ा कहंदा सी,
हाए ओ वे हूँ नाल बिथावे, हाय ओ वे मेनू गल नाल लावे,
साईंया वे मेरी रूह दा जानी।
साईं मुड़ के तू आजा झलक बिख्लाई जा,
दे न दर्द बिछोड़े फेरा तू पाई जा,
हाए ओ मेरा दर्द मिटावे साईं वे हूँ फेरा पावे,
साईंया वे मेरी रूह दा जानी।
साईं मेनू फेर कदी भी रोली न,
मेरी भूल बक्शादे साथ कदी छोड़ी ना,
हायो नि हूँ मेल वदा दे सैयां वे मेनू पार लगा दे,
साईंया वे मेरी रूह दा जानी।
रूह दा जानी ! Rooh Da Jani ! Puneet khurana ! Jai Guru Ji ! Blessings Always ! Taranhar
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Title Song :- Rooh Da Jani
Singer :- Puneet Khurana
Lyrics :- Pradeep Sahil
Music Director :- Raj Atul Sahu
Singer :- Puneet Khurana
Lyrics :- Pradeep Sahil
Music Director :- Raj Atul Sahu
उस परम शक्ति के साथ आत्मा का ऐसा गहरा नाता है कि वह हृदय की हर पुकार को समझती है, और उसका प्रेम कभी मुख नहीं मोड़ता। जब मन दुख और वियोग के बोझ तले दबा हुआ तड़पता है, तो वह शक्ति अपने प्रेम से उसे फिर से हँसाना सिखाती है। उसका प्रेम ऐसा है जो हर रूठे मन को मनाता है, और हर टूटे दिल को अपने करीब लाकर उसे सांत्वना देता है। यह प्रेम जीवन को फिर से जीवंत करता है, और आत्मा को उस वियोग के दर्द से मुक्त करता है, जो उसे रुलाता है।
वह शक्ति अपने प्रेम से हर दर्द को मिटाती है और जीवन को फिर से अपने साथ जोड़ती है। उसकी एक झलक ही मन को आलोकित कर देती है, और उसका साथ हर बिछोड़े के दुख को भुला देता है। वह अपने प्रेम से हर भूल को क्षमा करती है और मन को सदा अपने करीब रखती है।
वह शक्ति अपने प्रेम से हर दर्द को मिटाती है और जीवन को फिर से अपने साथ जोड़ती है। उसकी एक झलक ही मन को आलोकित कर देती है, और उसका साथ हर बिछोड़े के दुख को भुला देता है। वह अपने प्रेम से हर भूल को क्षमा करती है और मन को सदा अपने करीब रखती है।
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Author - Saroj Jangir
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