मैं सेवक हा सतगुरु तेरा न भूल जाइ गरीब जानके

मैं सेवक हा सतगुरु तेरा न भूल जाइ गरीब जानके


आवाज मारदी कुटियाँ गरीब दी, कदी ते फेरा पाओ सतगुर,
बड़ी देर तो प्यासियां ने सदरा, आओ जी घर आओ सतगुरु।

आवाज मारदी कुटियाँ गरीब दी, कदी ते फेरा पाओ सतगुर,
बैठा पलका दी सहज विशाके, विराजो बावा लाल आके।
मैं सेवक हां सतगुरु तेरा, न भूल जाइ गरीब जानके।

आउंदे जांदे तेरे सेवका दे हाथ, मैं सुनेहा सदा भेजदा रहा,
मूड मूड ओहना रहा ते खलोके, लाल तनु वेख दा रहा।
किसे रूप च भी आ मेरे सतगुरु, ले जावा गा पेहशान के,
मैं सेवक हां सतगुरु तेरा, न भूल जाइ गरीब जानके।

मेरे कोल ता निर्माण हुंदा, मैं तेरे दर आउंदा,
फड़ चरनी तेरे न, कदे छड़ दा ते नाल लेके घर जांदा।
जानी जान सब कुछ जान दा, तू चुप बंडी बैठा जानके,
मैं सेवक हां सतगुरु तेरा, न भूल जाइ गरीब जानके।

जदो आव दा दिहाड़ा दाता, दूज दा तू आप न सब भुलान्दा,
गल लाके सबना नु प्यार देवे, चरना दे नाल लावदा।
सुख देव कहे मैं भी, किते देख ला गुरु जी तेरी छा मनके,
मैं सेवक हां सतगुरु तेरा, न भूल जाइ गरीब जानके।


Kadi Tan Phera Pao Satgur | Jai Jai Bawa Laal Di (VCD) | Sukhdev Dhamaka | Creator Devotional

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Label : Creator Audio Video
Album : Jai Jai Bawa Laal Di
Singer : Sukhdev Dhamaka
Music : Gurmeet Singh
Producer : Daljit Singh Arora (98145-93858)

गरीब की कुटिया से पुकार उठती है कि सतगुरु कब आएंगे और दर्शन देंगे। प्यासी आत्मा लंबे समय से प्रतीक्षा में है, मन बेचैन होकर सतगुरु को घर आने की विनती करता है। सतगुरु से आस है कि वे सहज भाव से पलक पर विराजें और अपनी कृपा बरसाएं। सेवक का मन बार-बार यही कहता है कि सतगुरु उसे भूल न जाएं, उसकी गरीबी को पहचानें और अपने दर्शन से जीवन संवार दें।

सेवक हर पल सतगुरु को याद करता है, उनके आने-जाने के रास्तों पर नजर रखता है। मन में एक ही इच्छा है कि किसी भी रूप में सतगुरु आएं और उसे पहचानकर अपने साथ ले जाएं। वह खुद को सतगुरु का दास मानता है, उनकी कृपा का भरोसा रखता है और यही प्रार्थना करता है कि उसकी पुकार सुनी जाए। सेवक का विश्वास है कि सतगुरु के दर पर आने से उसका मन निर्मल हो जाता है। वह सतगुरु के चरणों में लीन होना चाहता है, उनके साथ रहकर जीवन को धन्य करना चाहता है। सतगुरु को वह सब कुछ जानने वाला मानता है, जो चुपचाप सब देखता और समझता है। सेवक का मन यही कहता है कि सतगुरु उसे कभी नहीं भूलेंगे।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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