कोड्डी कोड्डी बगड़ बुहारूं दर्द उठे कमर म
कोड्डी कोड्डी बगड़ बुहारूं दर्द उठे कमर म
कोड्डी–कोड्डी बगड़ बुहारूं,
दर्द उठे कमर में, हो राजीड़ा,
इब ना रहूंगी तेरे घर में।।
द्योराणी–जिठानी बोल्ली मारैं,
जिब क्यूं सौवै थी बगल में, हो राजीड़ा,
इब ना रहूंगी तेरे घर में।।
सास–नणद मेरी धीर बंधावैं,
होती आवै सै जगत में, हो राजीड़ा,
इब ना रहूंगी तेरे घर में।।
छोटा देवर खरा रसीला,
दाई नै बुलावै इक छन में, हो राजीड़ा,
इब ना रहूंगी तेरे घर में।।
छोटा देवर नै बाहण बियाह द्यूं,
दाई बुलाई इक छन में, हो राजीड़ा,
इब ना रहूंगी तेरे घर में।।
दर्द उठे कमर में, हो राजीड़ा,
इब ना रहूंगी तेरे घर में।।
द्योराणी–जिठानी बोल्ली मारैं,
जिब क्यूं सौवै थी बगल में, हो राजीड़ा,
इब ना रहूंगी तेरे घर में।।
सास–नणद मेरी धीर बंधावैं,
होती आवै सै जगत में, हो राजीड़ा,
इब ना रहूंगी तेरे घर में।।
छोटा देवर खरा रसीला,
दाई नै बुलावै इक छन में, हो राजीड़ा,
इब ना रहूंगी तेरे घर में।।
छोटा देवर नै बाहण बियाह द्यूं,
दाई बुलाई इक छन में, हो राजीड़ा,
इब ना रहूंगी तेरे घर में।।
कोडी कोडी बगड़ बुहारू दर्द उठा स कमर म हो राजीड़े । इब ना रहु ते रे घर म ॥ बहुत ही सुन्दर जच्चा गीत
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Admin - Saroj Jangir
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