दादू मेरी उल्यारू जिकुड़ी दादू मी पर्वतों को वासी

दादू मेरी उल्यारू जिकुड़ी दादू मी पर्वतों को वासी

दादु मेरि उल्यारू जिकुड़ी,
दादु मि परबतू को वासी,
झम्म झमलै...
दादु मेरि उल्यारू जिकुड़ी,
दादु मि परबतू को वासी,
झम्म झमलै...

छायो मि बाजी को पियारू,
छायो मि मांजी को लाडुलो,
छौ मेरा गौला को हसुलौ,
दादु रै बौजी को भेंटूलौ।
झम्म झमलै...

दादु मिन रौंसुल्यूं का बीच,
बैठी की बांसुली बजैनी,
दादु मिन चैढि की चुलख्यूं,
चलकदा हयूंचुला द्यखिनी।
झम्म झमलै...

देखि मिल म्वारयूँ को रुणाट,
दादु रै कौथिग का थाल,
दादु बै पोथली द्यखीनी,
ल्हेन्द मिल रेशमी रूमाल।
झम्म झमलै...

दादु वो रूड़ि का कौथिग,
स्यूँद सी सैंण मा कि कूल,
दादु वो सौंजड्यौं कि टोल,
ह्वे ग्याई तीमला को फूल।
झम्म झमलै...

दादु रै उड़मिला बुराँसुन,
लुछिनी भौंरुं की जिकुड़ी,
दादु रै किन्नवड्रियूं क बीच,
द्येखी मिन हैंसदी फ्योंलड़ी।
झम्म झमलै...

झुमकि सी तुड़तुड़ी मंगरी,
मखमली हैरि सी अंगड़ी,
फील्वर्यो हलकदी धौंप्यली,
घुंघुटि सी लौंकदी कुयड़ी।
झम्म झमलै...



Dadu meri ulyaru jikudi || narendra singh negi || gadwali song

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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