चंदन रुख कटाय के अगड़ पलणिया घड़ा

चंदन रुख कटाय के अगड़ पलणिया घड़ा

चंदन रुख कटाय के
अगड़ पलणिया घड़ा,
मेरे आंगण में अमला बो दिया।।

रेसम डोर बटाय के
अगड़ पलणिया झूला,
मेरे आंगण में रम्यां।।

धण पिया दोनूं बैठ गए,
दोनूं मैं पड़ गया न्याव,
मेरे आंगण में रम्यां।।

गोरी जो थम जनमोगी धीअड़ी,
थारे काट ल्यांगे नाक अर कान,
मेरे आंगण में रम्यां।।

राजा धी जामै थारी भावज,
कोए हम रै जामांगे नंदलाल,
मेरे आंगण में रम्यां।।

नो पे दस मासियां बाद,
हो गया नंदलाल,
मेरे आंगण में रम्यां।।

इक भली करी मेरे राम ने,
मेरे बच गए नाक अर कान,
मेरे आंगण में रम्यां।।

गोरी हम रै कह्या हंस-खेल कै,
कोए थम नै करी सतभा,
मेरे आंगण में रम्यां।।



कोडी कोडी बगड़ बुहारू दर्द उठा स कमर म हो राजीड़े । इब ना रहु ते रे घर म ॥ बहुत ही सुन्दर जच्चा गीत

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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