आये है दिन नवरातों के मेरी मैया के जगरातों के

आये है दिन नवरातों के मेरी मैया के जगरातों के


आए हैं दिन नवरातों के,
मेरी मैया के जगरातों के,
जिस घर में माँ की
ज्योत जगाई जाती है,
माँ नवरातों में
धन बरसाने आती है।

तू खर्चा कर नवरातों में,
तू खर्चा कर जगरातों पे,
फिर देख तू माँ कैसे
तक़दीर बनाती है,
माँ नवरातों में
धन बरसाने आती है।

जिस घर में होते नवराते,
वहाँ माँ के पैर पड़ जाते,
उस घर की लुगाई
सेठानी कहलाती है,
माँ नवरातों में
धन बरसाने आती है।

जब देती माँ देती जाए,
लाखों के करोड़ों बन जाए,
महँगी चीजें सस्ती
लगने लग जाती हैं,
माँ नवरातों में
धन बरसाने आती है।

तेरी किस्मत बंद है ताले में,
और चाबी माँ के हवाले में,
कहता है ‘पवन’
मैया वो चाबी घुमाती है,
माँ नवरातों में
धन बरसाने आती है।

आए हैं दिन नवरातों के,
मेरी मैया के जगरातों के,
जिस घर में माँ की
ज्योत जगाई जाती है,
माँ नवरातों में
धन बरसाने आती है।


LAKHBIR SINGH LAKKHA Devi Bhajan | आये मैया के नवराते | Aaye Maiya Ke Navrate | माता के भजन

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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