मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां गरीब घर भजन
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना,
आ जाना मैया,
आ जाना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
और चढ़ावे लाल लाल चोला,
मैं तो गरीब मेरी मां,
चुनरिया में खुश रहना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
और पहनावे सोने का टीका,
मैं तो गरीब मेरी मां,
बिंदिया में खुश रहना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
और पहनावे सोने का हरवा,
मैं तो गरीब मेरी मां,
फूलों में खुश रहना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
और भोग लगाएं हलवा पुरी का,
मैं तो गरीब मेरी मां,
मेरे भाव में ही खुश रहना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना,
आ जाना मैया,
आ जाना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना,
आ जाना मैया,
आ जाना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
और चढ़ावे लाल लाल चोला,
मैं तो गरीब मेरी मां,
चुनरिया में खुश रहना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
और पहनावे सोने का टीका,
मैं तो गरीब मेरी मां,
बिंदिया में खुश रहना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
और पहनावे सोने का हरवा,
मैं तो गरीब मेरी मां,
फूलों में खुश रहना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
और भोग लगाएं हलवा पुरी का,
मैं तो गरीब मेरी मां,
मेरे भाव में ही खुश रहना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना,
आ जाना मैया,
आ जाना,
मेरी छोटी सी झोपड़ी है मां,
गरीब घर आ जाना।
भजन श्रेणी : माता रानी भजन (Mata Rani Bhajan)
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मेरी छोटी सी झोपड़ी में भी जब माँ आ जाती हैं तो पूरा घर महकने लगता है। गरीब घर हो या अमीर, माँ को तो बस सच्चा प्यार चाहिए। लाल चोला चढ़ा दो, चुनरिया ओढ़ा दो, फिर भी वे भाव देखकर खुश हो जाती हैं। सोने का टीका या बिंदिया पहनाओ, या फिर फूलों की माला, माँ को इन चीजों से ज्यादा अपने बच्चे का साफ दिल पसंद आता है।
हलवा पूरी का भोग लगाओ या सिर्फ रोटी-नमक, माँ मेरे भाव में ही खुश रहती हैं। झोपड़ी के छोटे-छोटे आँगन में भी वे आकर बैठ जाती हैं, जैसे अपने घर आई हों। गरीब माँ का बेटा जब पुकारता है तो माँ बिना देर किए चली आती हैं। कोई चढ़ावा बड़ा हो या छोटा, माँ को तो बस उसकी निश्छल पुकार सुनाई देती है।
जब माँ गरीब घर में पधारती हैं तो दुख-तकलीफ सब भूल जाते हैं। दिल में एक अनोखी शांति छा जाती है। छोटी सी झोपड़ी भी उस पल महल जैसी लगने लगती है। माँ का आना ही सबसे बड़ा चढ़ावा है।
आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री वैष्णो देवी जी की।
हलवा पूरी का भोग लगाओ या सिर्फ रोटी-नमक, माँ मेरे भाव में ही खुश रहती हैं। झोपड़ी के छोटे-छोटे आँगन में भी वे आकर बैठ जाती हैं, जैसे अपने घर आई हों। गरीब माँ का बेटा जब पुकारता है तो माँ बिना देर किए चली आती हैं। कोई चढ़ावा बड़ा हो या छोटा, माँ को तो बस उसकी निश्छल पुकार सुनाई देती है।
जब माँ गरीब घर में पधारती हैं तो दुख-तकलीफ सब भूल जाते हैं। दिल में एक अनोखी शांति छा जाती है। छोटी सी झोपड़ी भी उस पल महल जैसी लगने लगती है। माँ का आना ही सबसे बड़ा चढ़ावा है।
आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री वैष्णो देवी जी की।
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