दूरों से चल के आया तेरे दरबार मां भजन
दूरों से चल के आया,
तेरे दरबार मां,
तेरे दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू,
मैया पहाड़ों वाली मां,
मेरी शेरोवाली,
तेरा दरबार मां,
सोहना दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू।
दूर-दूर से मां भगत,
तेरे द्वार पे आते हैं,
तेरे द्वारे आते हैं,
प्रेम से दर्शन पाते हैं,
ऊंचे पर्वत माई,
मैया तेरा दरबार मां,
सोहना दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू।
ध्यान नू जैसे मां भगत,
तूने लाखों तारे हैं,
मधुकैटभ जैसे राक्षस,
माई तुने मारे हैं,
भगत के लिए मैया,
तेरा दरबार मां,
सोहना दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू।
अकबर अहंकारी मां,
तुझे आजमाने आया था,
तेरी जोत बुझाने को,
लोहे का तवा चढ़ाया था,
तवा फाड़ निकली ज्वाला,
हुआ जय जयकार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू।
दूरों से चल के आया,
तेरे दरबार मां,
तेरे दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू,
मैया पहाड़ों वाली मां,
मेरी शेरोवाली,
तेरा दरबार मां,
सोहना दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू।
तेरे दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू,
मैया पहाड़ों वाली मां,
मेरी शेरोवाली,
तेरा दरबार मां,
सोहना दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू।
दूर-दूर से मां भगत,
तेरे द्वार पे आते हैं,
तेरे द्वारे आते हैं,
प्रेम से दर्शन पाते हैं,
ऊंचे पर्वत माई,
मैया तेरा दरबार मां,
सोहना दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू।
ध्यान नू जैसे मां भगत,
तूने लाखों तारे हैं,
मधुकैटभ जैसे राक्षस,
माई तुने मारे हैं,
भगत के लिए मैया,
तेरा दरबार मां,
सोहना दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू।
अकबर अहंकारी मां,
तुझे आजमाने आया था,
तेरी जोत बुझाने को,
लोहे का तवा चढ़ाया था,
तवा फाड़ निकली ज्वाला,
हुआ जय जयकार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू।
दूरों से चल के आया,
तेरे दरबार मां,
तेरे दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू,
मैया पहाड़ों वाली मां,
मेरी शेरोवाली,
तेरा दरबार मां,
सोहना दरबार मां,
दास खड़ा तेरे दर्शन नू।
भजन श्रेणी : माता रानी भजन (Mata Rani Bhajan)
#नवरात्रस्पेशल| दूरों से चल के आया #मातारानी का नया भजन #MATARANI BHAJAN | BY SD |
पहाड़ों की ऊँचाई पर स्थित उस दरबार में दूर-दूर से लोग आते रहते हैं। थके-माँदे पैरों से चलकर भी जब भक्त माता के द्वार पर पहुँचते हैं, तो सारा थकान उतर जाता है। शेरों वाली माँ का दरबार इतना सुंदर और शक्तिशाली है कि एक बार दर्शन पा लेने पर मन को असीम शांति मिल जाती है। जैसे कोई बच्चा माँ की गोद में सिर रख दे, वैसे ही भक्त वहाँ सब कुछ भूलकर खड़े हो जाते हैं।
मधुकैटभ जैसे राक्षसों को माँ ने अपने हाथों से मारा था। भक्तों की रक्षा के लिए वे हमेशा तैयार रहती हैं। ध्यान से पुकारो तो लाखों भक्तों की पुकार सुन लेती हैं। अकबर जैसे अहंकारी जब ज्वाला को बुझाने आया और लोहे का तवा चढ़ा दिया, तो माँ की ज्वाला और भी तेज होकर फूट पड़ी। जय-जयकार गूंज उठा। अहंकार टूट गया और शक्ति का प्रमाण सबके सामने आ गया। माँ की ज्योति कभी बुझती नहीं, बस प्रेम और श्रद्धा से जलती रहती है।
जो भी सच्चे मन से पहाड़ चढ़कर आता है, माँ उसकी हर इच्छा सुन लेती हैं। मेरी शेरों वाली माँ, पहाड़ों वाली माँ, तेरा दरबार सबके लिए खुला है। वहाँ पहुँचकर बस खड़े हो जाओ, दर्शन की चाहत में आँखें भर आएँगी और दिल हल्का हो जाएगा।
आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री वैष्णो देवी जी की।
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Tere Darabar Man,
Tere Darabar Man,
Das Khada Tere Darshan Nu,
Maiya Pahadon Vali Man,
Meri Sherovali,
Tera Darabar Man,
Sohana Darabar Man,
Das Khada Tere Darshan Nu.
Tere Darabar Man,
Tere Darabar Man,
Das Khada Tere Darshan Nu,
Maiya Pahadon Vali Man,
Meri Sherovali,
Tera Darabar Man,
Sohana Darabar Man,
Das Khada Tere Darshan Nu.
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Author - Saroj Jangir
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