भवन में अम्बे माँ झूले भजन

भवन में अम्बे माँ झूले भजन

अम्बे माँ झूले भवन में,
अंबे माँ झूले भवन में,
है नवरातो का दौर,
धरा पे छा रही है हरियाली,
लगे बोलन पपीहा मोर,
कूक रही कोयलिया काली,
है नवरातो का दौर,
धरा पे छा रही है हरियाली।
आई सुखो की नई बहारें,
आई सुखो की नई बहारें,
दुख को सब भूले भवन में,
भवन में अम्बे माँ झूले,
भवन में अम्बे माँ झूले,
भवन में अंबे माँ झूले।

सरस्वती और शिव शंकर का
डमरू वीणा बाज रहे,
बामन भैरों छप्पन कलुआ
ठुमक ठुमक के नाच रहे,
सरस्वती और शिव शंकर का
डमरू वीणा बाज रहे,
वामन भैरो छप्पन कलुआ
ठुमक ठुमक के नाच रहे,
फूल बरस रहे देव लोक से
फूल बरस रहे देव लोक से,
देव समाये ना फुले
भवन में,
भवन में अम्बे माँ झूले,
भवन में अंबे माँ झूले।

शीतल मंद हवा के झोके
चल रहे होले होले होले रे,
बरखा रानी बरसे थम थम
अपना घूँघट खोले रे,
शीतल मंद हवा के झोके
चल रहे होले होले होले रे,
बरखा रानी बरसे थम थम
अपना घूँघट खोले रे,
नाच रहे माँ के दीवाने
मटका मटका कुले,
भवन में अम्बे माँ झूले,
भवन में अंबे माँ झूले।

कहे अनाड़ी जश्न मनाया
नभ में देशों दिशाओ ने,
जयकारे माता के बोले मिलकर
मस्त फिजाओ में,
कहे अनाड़ी जश्न मनाया
 नभ में दसो दिशाओ ने,
जयकारे माता के बोले,
मिलकर मस्त फिजाओ में,
ऐसे में ऐ लक्खा तू भी
ऐसे में ऐ लक्खा तू भी,
चरण मईया के छू ले भवन में,
भवन में अम्बे माँ झूले,
भवन में अंबे माँ झूले।

भवन में अम्बे माँ झूले,
भवन में अंबे माँ झूले।



भवन में अम्बे माँ झूले मैया रानी का ये भजन झूमने पर मजबूर कर देगा ~ Vishwajeet Lakha
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