मेरे श्याम हे घनश्याम बृज में आया है तूफ़ान, पानी ही पानी चारों और फैला मुश्किल में है जान, तू है जग का रचैया सबकी पार लगा दे निया।
इन्द्र देव गुस्साए है जल ही जल बरसाए है, पल भर में ब्रिज नगरी में परलय ले अये है, तराही तराही चौ और मची है हम सभी है परशान, तू है जग का रचैया सबकी पार लगा दे निया।
मुश्किल में ब्रिज नगरी है जल में डूबी सगरी है, हम पर भी प्रभु कर किरपा तू तो देया की गगरी है, हमने सुना है दरबार पे तेरे बनते बिगड़े कम, तू है जग का रचैया सबकी पार लगा दे निया।
इतनी जो सुनी मन मोहन ऊँगली पर लिया गोवर्धन, तार दिया ब्रिज बसियो को जय हो तेरी भगवान, इंदर देव भी लजित हो के करते तेरा गुणगान, तू है जग का रचैया सबकी पार लगा दे निया।
मेरे श्याम हे घनश्याम बृज में आया है तूफ़ान, पानी ही पानी चारों और फैला मुश्किल में है जान, तू है जग का रचैया सबकी पार लगा दे निया।
मेरे श्याम हे घनश्याम बृज में आया है तूफ़ान, पानी ही पानी चारों और फैला मुश्किल में है जान, तू है जग का रचैया सबकी पार लगा दे निया।
ब्रज का भाव भरा भजन | ब्रज गलियों में झूम झूम के | मन की तपन बुझाओं | राधे राधे गाओ..