कुछ पाने के खातिर तेरे दर, हम भी झोली फैलाए हुए हैं, यहाँ झोली सभी की है भरती, इसलिए हम भी आए हुए हैं, कुछ पाने के खातिर तेरे दर, हम भी झोली फैलाए हुए हैं।।
कोई कह रहा कि महल बनवाऊंगा मैं, और कोई कह रहा कि शहंशाह बन जाऊँगा मैं,
पर कोई न जाने इस जीवन की क्या औक़ात है, चार दिन की चाँदनी और फिर अँधेरी रात है।
कोई इंसान, किसी इंसान को क्या देता है, बहाना आदमी का है, देने वाला तो वही देता है, गर जो देने पे आए, तो ढेरों के ढेर लगा देता है, और जो लेने पे आए, तो चमड़ी भी उधेड़ लेता है।
तुमने सब कुछ जहाँ में बनाया,
Mata Rani Bhajan lyrics in hindi
चाँद, तारे, ज़मीं, आसमाँ भी, चलते-फिरते ये मिट्टी के पुतले, तूने कैसे सजाए हुए हैं, कुछ पाने के खातिर तेरे दर, हम भी झोली फैलाए हुए हैं।।
हो गुनहगार कितना भी कोई, हिसाब माँगा न तुमने किसी से, तुमने औलाद अपनी समझकर,
सबके अवगुण छुपाए हुए हैं, कुछ पाने के खातिर तेरे दर, हम भी झोली फैलाए हुए हैं।।
जिसपे हो जाए रहमत तुम्हारी, मौत के मुँह से उसको बचा लो, तुमने लाखों-हजारों के बेड़े, डूबने से बचाए हुए हैं, कुछ पाने के खातिर तेरे दर, हम भी झोली फैलाए हुए हैं।।
कुछ पाने के खातिर तेरे दर, हम भी झोली फैलाए हुए हैं, यहाँ झोली सभी की है भरती, इसलिए हम भी आए हुए हैं, कुछ पाने के खातिर तेरे दर, हम भी झोली फैलाए हुए हैं।।
Devi Maa Bhajan | कुछ पाने के खातिर तेरे दर हम भी झोली फलाये हुए है | Richa Sharma