मेहंदीपुर के बाला जी, मैं तेरे दर पे आऊँगा, आके तेरे मंदिर में, मैं तेरे दर्शन पाऊँगा, मैं मेहंदीपुर में आऊँगा।
घाणी दिन की मन में आ रही, मैं भी दर्शन पाऊं, आके तेरे चरना में, बालाजी शीश झुकाऊं मैं, तेरे नाम का बनवा राख्या, लाल लंगोटा लाऊगा, मेहंदीपुर के बाला जी,
मैं तेरे दर पे आऊँगा।
जबसे तेरा ध्यान धरया, म्हारे हो गए मन के चाहे हो, लेके तेरे नाम बजरंग, ओ पहले नहीं समाये, तेरे मंदिर की चोटी ऊपर, मैं ध्वजा फहराऊंगा, मेहंदीपुर के बाला जी, मैं तेरे दर पे आऊँगा।